Chintpurni, 25 July
हिमाचल प्रदेश के ऊना जनपद स्थित आदि शक्ति माँ चिंतपूर्णी धाम में श्रावण अष्टमी मेले का शुभारम्भ पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ हो चुका है।श्रावण मास की अष्टमी तिथि का यह विशेष मेला हर वर्ष श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और विश्वास का केंद्र बनता है।दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माँ के पावन दर्शनों हेतु चिंतपूर्णी आते हैं और अपनी मनोकामनाएँ माँ के चरणों में समर्पित करते हैं।
श्रद्धा का संगम..सुरक्षा के संग
मेले के पहले दिन, शुक्रवार को सहायक मेला अधिकारी एवं एसडीएम अम्ब सचिन शर्मा ने मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।उन्होंने सभी सेक्टर मैजिस्ट्रेट्स के साथ बैठक कर सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और माँ के दरबार तक उनका आगमन सहज और सुरक्षित बना रहे।
एसडीएम शर्मा ने बताया कि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को दी जाने वाली तमाम सुविधाओं की गहन जांच की गई है। सभी सेक्टरों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है ताकि कोई अव्यवस्था न उत्पन्न हो।
भीड़ नियंत्रण और सुचारु दर्शन की व्यवस्था
मंदिर परिसर में विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि अधिक भीड़ एकत्र न हो। श्रद्धालुओं को अधिक देर तक मंदिर प्रांगण में न रुकने की विनम्र अपील की जा रही है, जिससे हर श्रद्धालु को माँ के दर्शन सहजता से प्राप्त हो सकें।प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी सेक्टर मैजिस्ट्रेट अपने-अपने क्षेत्रों में हर समय उपस्थित रहें और व्यवस्थाओं पर पैनी निगरानी बनाए रखें।
माँ चिंतपूर्णी – भक्तों की हर चिंता हरने वाली
माँ चिंतपूर्णी को ‘चिंताओं का नाश करने वाली’ देवी के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी सच्चे मन से माँ के दरबार में अपनी व्यथा कहता है, उसकी सारी चिंताएँ माँ हर लेती हैं। श्रावण मास में यहाँ आने का विशेष पुण्य बताया गया है। कहते हैं कि इस पावन मास में माँ के दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
श्रद्धालुओं से अपील
मेले में आने वाले सभी भक्तों से अनुरोध है कि वे प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें, भीड़-भाड़ से बचें, और माँ के पवित्र धाम में संयम, श्रद्धा और अनुशासन के साथ दर्शन करें