अमेरिका | भारत और अमेरिका के रिश्तों में बढ़ती खटास पर भारतीय मूल के अमेरिकी पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद जकारिया ने गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों ने दशकों की मेहनत से बने रिश्तों को गहरी चोट पहुँचाई है और यह ट्रंप प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी रणनीतिक गलती साबित हो सकती है।
जकारिया ने याद दिलाया कि भारत पर 50% टैरिफ लगाया गया, रूस से तेल खरीदने पर लगातार दबाव बनाया गया और सहयोग की बजाय भारत को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में भारत ने साफ संदेश दिया कि वह “किसी दबाव में फैसले नहीं लेगा।”
सीएनएन पर अपने विश्लेषण में जकारिया ने कहा— “भारतीयों को लगने लगा है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं रहा। वह अपने दोस्तों के साथ भी बर्बर व्यवहार कर सकता है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि इस नीति से भारत रूस और शायद चीन की ओर भी झुक सकता है। जकारिया के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत ने मल्टी-अलाइनमेंट नीति अपनाई थी, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन की अचानक बदलती नीतियों ने सारा समीकरण बिगाड़ दिया है।
पाँच राष्ट्रपतियों की तुलना
जकारिया ने ट्रंप से पहले के पाँच अमेरिकी राष्ट्रपतियों की नीतियों का हवाला भी दिया—
- बिल क्लिंटन (2000): भारत यात्रा से रिश्तों की नई शुरुआत।
- जॉर्ज बुश: भारत को महाशक्ति की तरह ट्रीट किया।
- बराक ओबामा: भारत को एशिया नीति की धुरी बनाया।
- ट्रंप 1.0: मोदी से निजी रिश्ते मजबूत किए, क्वाड को आगे बढ़ाया।
- जो बाइडेन: रक्षा और अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाया।
लेकिन जकारिया का मानना है कि ट्रंप 2.0 के आते ही हालात पूरी तरह पलट गए। भारत को सबसे ऊँचे टैरिफ वाले देशों में डाल दिया गया, जबकि पाकिस्तान पर केवल 19% टैरिफ लगाया गया और उसके साथ ऊर्जा व सैन्य सहयोग बढ़ा दिया गया।