कपिल शर्मा , ज्वालामुखी। हिमाचल में इस बार की भारी बरसात लगातार कहर बरपा रही है। कहीं पुल टूट रहे हैं, तो कहीं घर और खेत खतरे में आ गए हैं। कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी उपमंडल की फकेड़ पंचायत (मझीण) में हालात इतने बिगड़ गए हैं कि आधा दर्जन परिवार दिन-रात भय के साए में जीने को मजबूर हो गए हैं। पहाड़ी से लगातार दरकता मलबा सीधे इनके घरों और गौशालाओं पर गिर रहा है। डर और बेबसी की इस घड़ी में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और बर्तन बजाकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया।
सड़क विस्तार की लापरवाही बनी मुसीबत
जानकारी के अनुसार, कुटियारा-त्रिम्बलू (मझीण) सड़क के विस्तार के समय सड़क के साथ डंगे और नालियां नहीं बनाई गईं। अब भारी बारिश के कारण पहाड़ी दरक रही है और उसका पूरा मलबा सीधे घरों की ओर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण यह खतरा पैदा हुआ। अगर सड़क के साथ मजबूत डंगे और नालियां बनाई जातीं तो आज यह हालात नहीं होते।
“रात को भी जागकर गुजारना पड़ रहा है वक्त“
वार्ड पंच अनु कुमारी सहित ग्रामीण कांता देवी, नीलमा देवी, कमला देवी, कमला शर्मा, ईलमा देवी, सतीश कुमार, आत्मा राम और अभिषेक वशिष्ठ ने बताया कि बारिश शुरू होते ही उन्हें नींद हराम हो जाती है। किसी भी पल घर जमींदोज हो सकते हैं, इसी डर से रातें जागकर बितानी पड़ रही हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने जिंदगी भर की कमाई से मकान बनाए, लेकिन अब विभागीय लापरवाही के कारण सबकुछ खतरे के मुहाने पर है।
मुख्यमंत्री तक पहुंची गुहार
ग्रामीणों ने कहा कि ज्वालामुखी विधानसभा के साथ ही मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का विस क्षेत्र नादौन भी लगता है। ऐसे में पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री से सीधे गुहार लगाई है कि वे जल्द कार्रवाई करें। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि पहाड़ी को दरकने से रोकने के लिए मजबूत डंगे और नालियां बनाई जाएं ताकि घरों और गौशालाओं को बचाया जा सके।
जांच की भी मांग
ग्रामीणों ने इस सड़क निर्माण की निष्पक्ष एजेंसी से जांच करवाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में हुई अनदेखी और लापरवाही का खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
“सरकार सुनो हमारी आवाज़“
ग्रामीणों का कहना है कि वे मजबूरी में सड़कों पर वर्तन लेकर विरोध कर रहे हैं ताकि उनकी आवाज़ सरकार तक पहुंचे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।