नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना में बच्चों को मिलने वाले मुआवजे के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सड़क दुर्घटना में बच्चे की मृत्यु हो जाती है या वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो मुआवजे की गणना अब उसे कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जाएगी। इससे बच्चों को मिलने वाला मुआवजा पहले से कई गुना बढ़ जाएगा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया निर्देश?
- कुशल श्रमिक का न्यूनतम वेतन: अब बच्चे के लिए मुआवजे की राशि निर्धारित करने में उसकी आय का आधार उसके राज्य में कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के हिसाब से लिया जाएगा।
- दस्तावेज़ पेश करने की जिम्मेदारी: दावेदार को न्यूनतम वेतन से संबंधित प्रमाण पत्र या दस्तावेज़ न्यायाधिकरण के सामने प्रस्तुत करने होंगे। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता है, तो बीमा कंपनी इसे सुनिश्चित करेगी।
- सख्त अनुपालन: सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला देश के सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों तक भेजने के आदेश दिए हैं, ताकि इसका सख्ती से पालन हो।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है। 14 अक्टूबर 2012 को आठ वर्षीय हितेश पटेल सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ। इस दुर्घटना के कारण हितेश 30% स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया।
- प्रारंभिक फैसला: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने हितेश को 3.90 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
- हाई कोर्ट का फैसला: हितेश के परिवार ने इसे चुनौती दी और हाई कोर्ट ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8.65 लाख रुपये कर दी।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: सुप्रीम कोर्ट ने इसे और बढ़ाकर 35.90 लाख रुपये कर दिया, जो हाई कोर्ट के तय मुआवजे से लगभग चार गुना अधिक है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह फैसला देशभर में ऐसे हजारों मामलों में बड़ा प्रभाव डालेगा और बच्चों को न्याय दिलाने में मददगार साबित होगा।