नई दिल्ली | पहले हेल्थ इंश्योरेंस का मतलब यही होता था कि यह तभी काम आएगा जब आप अस्पताल में भर्ती होंगे। लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। लोग अब इंश्योरेंस का इस्तेमाल केवल हॉस्पिटलाइजेशन के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इलाज, टेस्ट और दवाइयों जैसी जरूरतों के लिए भी करने लगे हैं। इसकी वजह है OPD कवर (Out Patient Department Cover), जो अब हेल्थ इंश्योरेंस का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
तेजी से बढ़ा OPD कवर का चलन
Policybazaar की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन साल पहले केवल 5% हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में OPD कवर शामिल था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 22% तक पहुंच गया है। यानी अब लोग ऐसी पॉलिसी चुन रहे हैं जिसमें अस्पताल में भर्ती हुए बिना भी डॉक्टर से कंसल्टेशन, टेस्ट और दवाइयों का खर्च कवर हो सके।
OPD कवर में क्या-क्या शामिल है?
- डॉक्टर से कंसल्टेशन
- ब्लड टेस्ट, स्कैन और अन्य डायग्नोस्टिक जांच
- दवाइयों की खरीद
- डेंटल ट्रीटमेंट
- सालाना हेल्थ चेकअप
- आंखों की जांच व फिजियोथेरेपी (कुछ मामलों में)
इनमें से लगभग 90% खर्च सीधे इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कैशलेस या रिइम्बर्समेंट के जरिए निपटाए जाते हैं।
आम लोगों को कैसे हो रहा फायदा?
- बार-बार इस्तेमाल: साल में 3–4 बार लोग OPD कवर का लाभ उठा रहे हैं।
- बड़ी बीमारी से बचाव: जिनके पास OPD कवर है, उनमें हॉस्पिटलाइजेशन 5–10% तक कम हुआ है।
- डिजिटल हेल्थ: आधे से ज्यादा लोग अब वीडियो/फोन कॉल पर डॉक्टर से परामर्श ले रहे हैं।
- खर्च का बंटवारा:
- 35–40% खर्च डॉक्टर कंसल्टेशन पर
- 25–30% टेस्ट पर
- 20–25% दवाइयों पर
किसे सबसे ज्यादा फायदा?
यह सुविधा खासतौर पर शहरी प्रोफेशनल्स और युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
- 30–45 वर्ष के 33% लोग इसे चुन रहे हैं।
- 18–30 वर्ष के युवाओं की हिस्सेदारी 27% है।
- मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों में इसकी मांग सबसे ज्यादा है।