Shimla, Sanju
राष्ट्रीय आयुर्वेदिक दिवस पर शिमला में आयुष विभाग द्वारा आयोजित ‘आयुर्वेद मंथन’ कार्यक्रम में आयुष मंत्री यादविंदर सिंह गोमा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ, किसान और उद्यमी आयुर्वेद, पंचकर्म, औषधीय पौधों के संरक्षण और व्यावसायिक संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
आयुष मंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश आयुर्वेद के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। औषधीय पौधों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है। फार्मेसी इकाइयों को सोसायटी मोड में लाया जाएगा, जिससे गुणवत्ता, विपणन और ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के चुनिंदा स्थलों पर पंचकर्म सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि हिमाचल को आयुर्वेदिक वेलनेस टूरिज्म का केंद्र बनाया जा सके।
इस अवसर पर आयुष मंत्री ने ‘आयुष संकलन पोर्टल’ लॉन्च किया, जिससे प्रदेशभर के आयुर्वेदिक अस्पतालों, डिस्पेंसरियों और दवाओं की डिजिटल मॉनिटरिंग संभव होगी। ओपीडी, इनडोर सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टर्स की अटेंडेंस जैसी जानकारी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।कुछ जड़ी-बूटियों को कमर्शियल कैटेगरी में लाकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने की योजना है। भांग की औषधीय खेती को वैध बनाने पर सरकार संवेदनशील है और इस विषय पर अभी विमर्श जारी है।