महाराष्ट्र | राज्य के कई जिलों में मॉनसून के कहर से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश और बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जहां मूसलाधार बारिश और बादल फटने की घटनाओं से हालात और गंभीर बने। अब तक इस प्राकृतिक आपदा में चार लोगों की जान जा चुकी है।
शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी का आदेश
राज्य सरकार ने 23 सितंबर, सोमवार को स्थिति को देखते हुए प्रभावित जिलों में सभी स्कूल और कॉलेज (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर) में छुट्टी की घोषणा की।
18 लाख हेक्टेयर से अधिक फसलें प्रभावित
धाराशिव, बीड और सोलापुर जिलों में भारी वर्षा के कारण किसानों को गंभीर नुकसान हुआ है। मराठवाड़ा क्षेत्र में लगभग 18 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो चुकी है।
सड़कें और घरों को भारी नुकसान
बाढ़ और बढ़ते जलस्तर से कई गांवों का संपर्क कट गया है। लातूर, बीड, धाराशिव, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी और हिंगोली जिलों में 76 मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। छह सड़कों और पांच पुलों को भी गंभीर क्षति पहुंची है।
70 से अधिक पशुओं की मौत
बाढ़ और बारिश की वजह से मराठवाड़ा में 70 से अधिक पशु भी मारे गए हैं। धाराशिव में 21 और बीड में 16 पशुओं की मौत दर्ज की गई। लातूर और नांदेड़ में बिजली गिरने से दो व्यक्तियों की जान गई, जबकि लातूर में एक व्यक्ति बाढ़ में बह गया।
रेस्क्यू और राहत कार्य युद्ध स्तर पर
प्रशासन ने बचाव कार्य युद्ध स्तर पर किया। बीड में 70 लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए, जबकि जालना और धाराशिव में कई राहत और बचाव अभियान चलाए गए। परंडा तालुका के ढगपिंपरी और वडनेर गांवों में हेलिकॉप्टर के जरिए 27 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। अभी भी लगभग 150 लोग फंसे हुए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने लिया हालात का जायजा
एनसीपी सांसद सुनील तटकरे के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री अजित पवार सुबह से बाढ़ प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों के संपर्क में हैं और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। पवार 24 सितंबर को सोलापुर, धाराशिव और बीड जिलों का दौरा कर सकते हैं।