हरियाणा | हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक और विधायक दल के नेतृत्व को लेकर लंबे समय से रुकी हलचल अब नई दिशा लेने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में इस मसले पर हरी झंडी दे दी है। इस फैसले से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक बार फिर कांग्रेस विधायक दल का नेता बनने का मौका मिलेगा, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर भी बदलाव लगभग तय माना जा रहा है।
हुड्डा को विपक्षी चेहरा बनाने की तैयारी
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस अब संगठन और नेतृत्व संबंधी उलझनों को लंबे समय तक लटकाना नहीं चाहती। हुड्डा को विपक्ष का चेहरा बनाना पार्टी की अनुभवी और मजबूत नेतृत्व रणनीति को दर्शाता है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष पद पर बैकवर्ड समुदाय के नेता को नियुक्त कर पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधना चाहती है। इस फैसले का चुनावी असर और गुटबाजी पर असर आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
हुड्डा की मजबूत पकड़
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कांग्रेस में दबदबा किसी से छिपा नहीं है। दस वर्षों तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हुड्डा 2019 से 2024 तक विधायक दल के नेता भी रहे और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाते रहे। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी सामने आई थी और दोनों पदों पर फैसला लंबित रहा। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में हाईकमान ने यह पेच सुलझा दिया है और हुड्डा को फिर से कांग्रेस का प्रमुख विपक्षी चेहरा बनाया जाएगा।
प्रदेशाध्यक्ष पद पर बैकवर्ड कार्ड
मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष चौधरी उदयभान की जगह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। राव नरेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर 2009 में हरियाणा जनहित कांग्रेस से नारनौल से विधायक बनने से लेकर हुड्डा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहने तक दिलचस्प रहा है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि प्रदेशाध्यक्ष पद पर बैकवर्ड नेता को चुनकर कांग्रेस दक्षिण हरियाणा में चुनावी समीकरण मजबूत करना चाहती है।
कार्यकारी अध्यक्षों का फॉर्मूला फिर लागू
सूत्रों के अनुसार, इस बार भी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के साथ 2-3 कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की योजना बना रही है। बवानीखेड़ा से प्रदीप नरवाल और तेलूराम जांगड़ा संभावित कार्यकारी अध्यक्षों की सूची में शामिल हैं। पिछले कार्यकाल में भी चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए थे, जिसमें पूर्व सांसद श्रुति चौधरी भी शामिल थीं, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने और उनकी माता कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन की थी। फिलहाल रामकिशन गुर्जर, जितेंद्र कुमार भारद्वाज और सुरेश गुप्ता कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
हुड्डा खेमे को मजबूती
राजनीतिक हलकों में यह फैसला हुड्डा खेमे के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति और जिलाध्यक्षों की सूची तक, हाईकमान गुटबाजी संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। पहले कुमारी सैलजा को पूरा कोटा देकर संतुष्ट किया गया था। अब हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाकर और उनके समर्थकों को संगठन में महत्व देकर पार्टी फिर से संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।
रणदीप सुरजेवाला की भूमिका
दिल्ली सूत्रों के अनुसार, राव नरेंद्र सिंह की नजदीकियां हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला के साथ बढ़ी हैं। इसी वजह से उनकी दावेदारी मजबूत हुई है। खबरें यह भी हैं कि राव नरेंद्र सिंह का राहुल गांधी तक भी सीधा संपर्क है। इसके अलावा पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव और पूर्व CPS राव दान सिंह का नाम भी चर्चा में रहा, लेकिन हाईकमान ने लगभग सभी की सहमति से राव नरेंद्र सिंह के नाम पर निर्णय लिया है।