Shimla, Sanju
बहुचर्चित युग हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने सोमवार को अहम फैसला सुनाते हुए जिला अदालत की ओर से दोषियों को दी गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी को बरी करने के आदेश दिए हैं।
जिला अदालत ने 2017 में तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब यह फैसला सुनाया है।
परिजनों में रोष, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
फैसले पर मासूम युग के परिजनों ने कड़ा एतराज जताया है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि 11 साल बाद भी बेटे को न्याय नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा, “जिन दोषियों ने मेरे चार वर्षीय बेटे को बेरहमी से मार डाला, उन्हें फांसी होनी चाहिए थी। इतने साल बीत जाने के बाद भी दोषी जिंदा हैं। हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और दोषियों को फांसी दिलाने की मांग करेंगे।”
2014 में हुआ था अपहरण, 2016 में मिली लाश
गौरतलब है कि 14 जून, 2014 को शिमला के राम बाजार से तीन लोगों ने चार साल के मासूम युग का फिरौती के लिए अपहरण किया था। दो साल तक परिजनों को इंतजार कराने के बाद अगस्त 2016 में भराड़ी स्थित एक पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मासूम के शरीर में पत्थर बांधकर उसे जिंदा पानी से भरे टैंक में फेंक दिया था।
सीआईडी ने 25 अक्टूबर, 2016 को मामले की चार्जशीट अदालत में दायर की थी। 20 फरवरी 2017 से ट्रायल शुरू हुआ और करीब 10 माह के भीतर अदालत ने तीनों आरोपियों को फांसी की सजा सुना दी थी।