चंडीगढ़ | मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उद्योग जगत को गति देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने राइट टू बिजनेस एक्ट में संशोधनों को मंजूरी दी, जिससे उद्योगों के लिए लाइसेंस और अनुमतियों की प्रक्रिया और तेज होगी।
मुख्य बदलाव
कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि एक्ट में पहले 25 करोड़ रुपये तक की सीमा निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, जरूरी होने पर उससे अधिक मूल्य वाले उद्योगों को भी विभाग द्वारा शामिल किया जा सकेगा।
अनुमतियों में विस्तार
संजीव अरोड़ा ने बताया कि अब 5 और मंजूरियां इस एक्ट में जोड़ दी गई हैं। इनमें श्रम विभाग, फैक्ट्री लाइसेंस, कंसेंट टू इस्टेबलिश, कंसेंट टू ऑपरेट (प्रदूषण विभाग) और वन विभाग की एन.ओ.सी. शामिल हैं।
प्रक्रिया में तेजी
पहले केवल औद्योगिक पार्कों में स्वीकृत उद्योगों को 5 दिनों के भीतर मंजूरी मिलती थी। अब इसमें PUDA, लोकल बॉडीज और रियल एस्टेट क्षेत्र में स्वीकृत उद्योग भी शामिल किए गए हैं। नए ग्रीन और ऑरेंज प्रोजेक्ट्स को 15 दिनों के भीतर, जबकि प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए 18 दिनों के भीतर मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अब फाइल सही होने पर अधिकतम उद्योग 5 से 18 दिनों के भीतर मंजूरी प्राप्त कर सकेंगे। इस संशोधन से राज्य में उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया में तेजी आएगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।