Shimla, 29 September -लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति घाटी को यूनेस्को के मानव और बायोस्फीयर (MAB) कार्यक्रम के तहत देश के पहले शीत मरुस्थल बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा मिल गया है। यह मान्यता चीन के हांगझोउ में 26 से 28 सितम्बर, 2025 के बीच आयोजित 37वीं अंतरराष्ट्रीय समन्वय परिषद (MAB-ICC) की बैठक में प्रदान की गई। इसके साथ ही भारत के बायोस्फीयर रिजर्व की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि हिमाचल सरकार ने विकास और प्रकृति संरक्षण में संतुलन कायम रखने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों की पारंपरिक पारिस्थितिकी संरक्षण की भूमिका की सराहना की।
स्पीति कोल्ड डेजर्ट बायोस्फीयर रिजर्व लगभग 7,770 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें कोर ज़ोन (2,665 वर्ग किमी), बफर ज़ोन (3,977 वर्ग किमी) और ट्रांजिशन ज़ोन (1,128 वर्ग किमी) शामिल हैं। इसमें पिन वैली राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल आर्द्रभूमि और सरचू मैदान भी सम्मिलित हैं।
यह क्षेत्र 3,300 से 6,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और अपनी अनूठी शीत मरुस्थलीय पारिस्थितिकी के लिए प्रसिद्ध है। यहां 655 औषधीय जड़ी-बूटियों सहित 700 से अधिक वनस्पति प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा हिम तेंदुआ, तिब्बती भेड़िया, आइबेक्स, लाल लोमड़ी, हिमालयी स्नोकॉक और 800 से अधिक नीली भेड़ें इस क्षेत्र की जैव विविधता को विशिष्ट बनाती हैं।प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) अमिताभ गौतम ने कहा कि यह उपलब्धि हिमाचल के ठंडे रेगिस्तान को वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर स्थापित करेगी, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान को प्रोत्साहन देगी और जिम्मेदार इको-टूरिज्म के ज़रिए स्थानीय आजीविका को मज़बूती प्रदान करेगी।