वॉशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा की फीस बढ़ाकर $1,00,000 (लगभग ₹83 लाख) कर दी है, और अब इस वीज़ा प्रक्रिया में और बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने इस बारे में अहम खुलासा किया है। इस खबर के बाद भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों में हलचल मच गई है।
लुटनिक ने मौजूदा सिस्टम को बताया “गलत”
वाणिज्य मंत्री लुटनिक ने एक अमेरिकी मीडिया हाउस से बातचीत में कहा कि वर्तमान H-1B वीज़ा प्रक्रिया “बिल्कुल गलत” है। उनके अनुसार मौजूदा सिस्टम के तहत कम वेतन वाले आईटी प्रोफेशनल्स भी अमेरिका में काम करने और अपने परिवारों को लाने की अनुमति ले लेते हैं, जिसे वे बदलना चाहते हैं।
फरवरी 2026 से होंगे बदलाव
लुटनिक ने कहा कि $1,00,000 की फीस बढ़ोतरी फरवरी 2026 से लागू होगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इस अवधि के बीच ही वीज़ा प्रक्रिया में वास्तविक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। व्हाइट हाउस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि फीस वृद्धि मौजूदा वीज़ा धारकों पर लागू नहीं होगी। इसका असर सिर्फ नए और रिन्यूअल के लिए आवेदन करने वालों पर पड़ेगा।
लॉटरी सिस्टम पर भी सवाल
लुटनिक ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी प्रशासन H-1B वीज़ा के लॉटरी सिस्टम पर भी सवाल उठा रहा है। मंत्री ने कहा, “आगे चलकर आप वास्तविक बदलाव देखेंगे।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की दो बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों ने भी उन्हें बताया कि कुशल कर्मचारियों को लॉटरी के जरिए लाना अजीब है। अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो भारत से अमेरिका में काम करने जाने वाले आईटी पेशेवरों के लिए नियम और सख्त हो सकते हैं।