नई दिल्ली | भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने इतिहास का नया अध्याय लिखने की तैयारी में है। पार्टी पहली बार किसी महिला नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की ओर बढ़ रही है। अभी तक यह जिम्मेदारी जे.पी. नड्डा संभाल रहे थे, जिनका कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 तक बढ़ा दिया गया था। अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और पार्टी नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया के अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। इस बार महिला नेता को अवसर मिलने की संभावना सबसे ज्यादा जताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आंध्र प्रदेश की पूर्व केंद्रीय मंत्री दग्गुबती पुरंदेश्वरी और तमिलनाडु की विधायक वानति श्रीनिवासन इस पद की प्रमुख दावेदार हैं। इनमें से निर्मला सीतारमण को सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है, क्योंकि उनकी पकड़ दक्षिण भारत में पार्टी के विस्तार के लिहाज से अहम है। दग्गुबती पुरंदेश्वरी अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के चलते चर्चा में हैं, वहीं वानति श्रीनिवासन महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते इस रेस में शामिल हैं।
भाजपा का यह कदम महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में हाल के वर्षों में महिला वोटरों का रुझान पार्टी के पक्ष में बढ़ा है। साथ ही 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद पार्टी महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत संदेश देना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी महिला अध्यक्ष के विचार को मंजूरी दे दी है। इसे भाजपा की भविष्य की राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
1980 में स्थापना के बाद से भाजपा का नेतृत्व अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और अमित शाह जैसे दिग्गज नेता कर चुके हैं। अब पहली बार महिला अध्यक्ष की संभावना ने पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में उत्साह का माहौल बना दिया है।