नई दिल्ली | देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और पैदल यात्रियों की मौतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने पैदल यात्री सुरक्षा, हेलमेट नियमों के पालन और खतरनाक ड्राइविंग की रोकथाम के लिए राज्यों और नगर निकायों को कड़े निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
2023 में पैदल यात्रियों की मौतों में भारी वृद्धि
सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1,72,890 मौतें हुईं, जिनमें से 35,221 पैदल यात्री थे। यह कुल मौतों का 20.4% है, जो 2016 के 10.44% से दोगुना से भी अधिक है। कोर्ट ने फुटपाथों पर अतिक्रमण और गलत उपयोग को पैदल यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ाने वाला बताया।
50 बड़े शहरों में फुटपाथ और क्रॉसिंग का ऑडिट अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट ने भारत के 50 प्रमुख शहरों में फुटपाथ, क्रॉसिंग, ज़ेब्रा लाइन, फुटओवर ब्रिज और सड़क की रोशनी का व्यापक ऑडिट कराने का निर्देश दिया। ऑडिट में विशेष रूप से रेलगाड़ी स्टेशन, बस स्टैंड, स्कूल और बाजार जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों को प्राथमिकता दी जाएगी।
हेलमेट नियमों और खतरनाक ड्राइविंग पर सख्ती
कोर्ट ने दोपहिया वाहनों से होने वाली मौतों में वृद्धि पर चिंता जताई और हेलमेट नियमों के पालन के लिए तकनीकी साधनों जैसे ई-एनफोर्समेंट कैमरे लगाने के निर्देश दिए। साथ ही, गलत लेन ड्राइविंग, तेज ओवरटेकिंग और खतरनाक ड्राइविंग रोकने के लिए स्वचालित कैमरे, रंबल स्ट्रिप्स और टायर किलर जैसी तकनीक अपनाने को कहा गया।
अवैध हेडलाइट और हूटर पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने चमकदार LED हेडलाइट और अवैध हूटर के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। मंत्रालय और यातायात पुलिस को हेडलाइट की चमक और बीम कोण निर्धारित करने और जागरूकता अभियान चलाने का आदेश दिया गया।
ऑनलाइन शिकायत प्रणाली और समय पर कार्रवाई
अदालत ने सभी राज्यों को फुटपाथ और क्रॉसिंग से जुड़ी शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने का निर्देश दिया। शिकायतों का तत्काल निवारण और नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, राज्यों को छह महीने के भीतर पैदल यात्री पहुंच और सड़क डिज़ाइन नियम लागू करने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह कड़ा रुख और दिए गए निर्देश देश में सड़क सुरक्षा सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे न केवल पैदल यात्रियों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी भी आने की संभावना है।