Shimla, 18 October
सीपीआईएम हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी ने 26 नवंबर 2025 और 19 जनवरी 2026 को होने वाले मजदूर-किसान संगठनों के देशव्यापी प्रदर्शनों को सफल बनाने के लिए शिमला के कालीबाड़ी हॉल में राज्य स्तरीय अधिवेशन आयोजित किया। इस अधिवेशन में लगभग दो सौ पार्टी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
राज्य सचिव संजय चौहान ने अधिवेशन की अध्यक्षता की, जबकि डॉ. ओंकार शाद ने प्रस्ताव रखा कि पार्टी केंद्र सरकार की नवउदारवादी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष को तेज करते हुए मजदूरों-किसानों के आंदोलनों को पूर्ण समर्थन दे।सम्मेलन को राकेश सिंघा, प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा, कुशाल भारद्वाज, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, भूपेंद्र सिंह, गीता राम, राजेंद्र ठाकुर, मोहित वर्मा, जोगिंद्र कुमार, अशोक कटोच और नरेंद्र विरुद्ध ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी-नेतृत्व वाली सरकार की कॉर्पोरेट-परस्त और सांप्रदायिक नीतियों ने अमीर-गरीब की खाई को और चौड़ा कर दिया है। सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। वर्ष 2020 के काले कृषि कानूनों और मजदूर विरोधी चार लेबर कोड से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार मजदूरों-किसानों के अधिकारों को कुचलकर बड़े उद्योगपतियों का मुनाफा बढ़ाना चाहती है।नेताओं ने कहा कि इन नीतियों के कारण किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ी हैं, मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा समाप्त हुई है और ठेका व अस्थायी रोजगार के रूप में व्यापक शोषण हो रहा है। मजदूरों को मात्र ₹4,000 से ₹12,000 मासिक वेतन मिल रहा है, जबकि महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है।
प्रदेश में किसानों की बेदखली, मुआवजा, और एमएसपी जैसे मुद्दे अब तक अनसुलझे हैं। वक्ताओं ने कहा कि देश की आधी आबादी मात्र 3% संपत्ति की मालिक है, जबकि शीर्ष पाँच पूंजीपतियों के पास देश की 20% संपत्ति केंद्रित है।पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी अमीर-परस्त नीतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सांप्रदायिकता को हवा दे रही है, जिससे देश की एकता और अखंडता पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे व्यापक एकता बनाते हुए इन नीतियों के विरुद्ध संगठित संघर्ष करें।