जालंधर | पंजाब रोडवेज पनबस–पीआरटीसी ठेका कर्मचारी यूनियन ने राज्य सरकार की नीतियों को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए विरोध तेज करने का ऐलान किया है। रविवार को हुई यूनियन की राज्य स्तरीय बैठक में ठेका कर्मचारियों की स्थायी भर्ती में देरी और किलोमीटर स्कीम के तहत बसों की निजीकरण नीति का कड़ा विरोध किया गया।
बैठक में यूनियन के राज्य प्रधान रेशम सिंह गिल और महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में विभिन्न डिपो के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में कमल कुमार, बलविंदर सिंह, हरकेश विक्की, गुरप्रीत पन्नू, सतपाल सिंह सत्ता और चन्ना सिंह चणा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया
यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार बार-बार भरोसा दिलाने के बावजूद ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही। कर्मचारियों ने कहा कि नियमितीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज पहले ही सरकार को सौंप दिए गए, लेकिन ट्रांसपोर्ट विभाग की लापरवाही के कारण मामला लंबित पड़ा हुआ है।
निजीकरण के खिलाफ चेतावनी
यूनियन ने किलोमीटर स्कीम को परिवहन विभाग का निजीकरण बढ़ावा देने वाला फैसला बताया। पदाधिकारियों ने कहा कि इस स्कीम के टेंडरों से प्राइवेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यूनियन के विरोध के चलते पहले भी दो बार टेंडर रद्द हो चुके हैं, लेकिन सरकार बार-बार इन्हें जारी कर कर्मचारियों में रोष पैदा कर रही है।
आंदोलन की घोषणा
यूनियन ने घोषणा की कि 27 अक्टूबर से तरनतारन उपचुनाव के दौरान सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि 31 अक्टूबर को किलोमीटर स्कीम का टेंडर खोला गया, तो राज्य स्तरीय चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।