हरियाणा | हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से जारी गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान पर अब पार्टी ने सख्त रुख अपनाया है। संगठन में अनुशासन बहाल करने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) के गठन को मंजूरी दे दी है। इस कमेटी का संचालन सीधे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की निगरानी में होगा। इसे राव का ‘सेंट्रल कमांड मॉडल’ भी कहा जा रहा है, जो संगठन में कमान को शीर्ष स्तर पर केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पूर्व सांसद धर्मपाल मलिक को अनुशासन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में अकरम खान, कैलाशो सैनी, पूर्व विधायक अनिल धन्तौड़ी और एडवोकेट रोहित जैन (सदस्य सचिव) शामिल हैं। आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
गुटबाजी पर सर्जिकल स्ट्राइक?
हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला के तीन प्रमुख गुटों में बंटी रही है। आपसी टकराव और बयानबाजी के कारण संगठन लंबे समय से कमजोर पड़ा हुआ है। राव नरेंद्र सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद ही संकेत दिया था कि अब कांग्रेस में “अनुशासन की राजनीति” चलेगी, “मंच की राजनीति नहीं।”
चरखी दादरी में हुई कार्यकर्ता बैठक में हंगामे और पूर्व प्रत्याशी मनीषा सांगवान को जारी कारण बताओ नोटिस को इस कमेटी गठन का ट्रिगर प्वाइंट माना जा रहा है। राव गुट इसे संगठन को मजबूत बनाने वाला कदम बता रहा है, जबकि विरोधी गुट इसे सत्ता केंद्रीकरण की रणनीति कह रहे हैं।
समिति में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन
| सदस्य | भूमिका | पहचान |
| धर्मपाल मलिक | अध्यक्ष | वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद |
| अकरम खान | सदस्य | अल्पसंख्यक समुदाय से |
| कैलाशो सैनी | सदस्य | महिला प्रतिनिधित्व |
| अनिल धन्तौड़ी | सदस्य | जमीनी संगठन से जुड़े |
| रोहित जैन | सदस्य सचिव | विधि विशेषज्ञ |
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद आया आदेश
अनुशासन समिति की घोषणा से कुछ घंटे पहले ही राव नरेंद्र सिंह ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। यह बतौर प्रदेश अध्यक्ष उनकी राहुल से पहली मुलाकात थी। माना जा रहा है कि राव ने इस बैठक में संगठनिक रणनीति और अनुशासन नीति पर विस्तार से चर्चा की और उसके बाद हाईकमान ने यह बड़ा कदम मंजूर किया।
हरियाणा बनेगा संगठनात्मक प्रयोगशाला?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, हरियाणा को कांग्रेस “टेस्ट केस” के रूप में देख रही है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो इसे राजस्थान, पंजाब और झारखंड जैसे राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।