चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस के दफ्तर में इन दिनों माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। बैठकों में अब मुस्कुराहटों की जगह सतर्क निगाहें हैं। हर नेता अपने शब्दों को तौलकर बोल रहा है, क्योंकि अब पार्टी में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है।
लोकसभा चुनाव में 10 में से 5 सीटें जीतकर हरियाणा की राजनीति में दोबारा मजबूती पाने वाली कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बिखराव की वजह से सत्ता से दूर रह गई थी। यह हार बाहरी नहीं, बल्कि अंदरूनी कलह की गूंज थी — खेमेबाजी, बयानबाजी और अनुशासनहीनता ने संगठन की जड़ों को हिला दिया था।
अब इसी बिखराव को खत्म करने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने अपने हाथों में ली है।
हाईकमान की अनुमति के बाद उन्होंने पार्टी में ‘अनुशासन की सर्जरी’ शुरू की है और नई अनुशासन समिति गठित की है। उनका संदेश साफ है — “अब पार्टी में मर्यादा चलेगी, मनमानी नहीं। राय संगठन में दी जाएगी, मीडिया में नहीं।”
राव नरेंद्र की पहली बड़ी परीक्षा
राजनीतिक रूप से यह समिति राव नरेंद्र के लिए कवच भी है और कसौटी भी।
कवच इसलिए कि इसके जरिए वे संगठन में अनुशासन लागू कर सकेंगे, और कसौटी इसलिए कि अगर यह पहल असफल रही तो इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी।
उनकी साख अब समिति की सक्रियता और सख्ती से जुड़ी है। यह समय कांग्रेस के लिए केवल ‘संगठन सुधार’ का नहीं, बल्कि ‘नेतृत्व परीक्षा’ का भी है।
पहले भी बनी थी कमेटी, लेकिन रही निष्क्रिय
इससे पहले पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में भी अनुशासन समिति बनाई गई थी, लेकिन वह निष्क्रिय रही और उसका कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया।
समिति में संतुलन और संदेश दोनों
नई अनुशासन समिति में पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।जाट समुदाय से वरिष्ठ नेता धर्मपाल मलिक को चेयरमैन बनाया गया है।
अल्पसंख्यक वर्ग से अकरम खान, ओबीसी और महिला वर्ग से कैलाशो सैनी, एससी व युवा वर्ग से अनिल धन्तौड़ी, तथा वैश्य समाज से वरिष्ठ अधिवक्ता रोहित जैन को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।
इस संतुलन से कांग्रेस ने संदेश दिया है कि — “संगठन में सर्जरी भी होगी और संवेदनशीलता भी बनी रहेगी।”
‘फ्रीहैंड’ लेकिन चेतावनी के साथ
दिल्ली हाईकमान ने राव नरेंद्र को संगठन को संभालने के लिए पूरा फ्रीहैंड दिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अगर अनुशासन नहीं दिखा तो नियंत्रण सीधे दिल्ली से होगा।
यह समिति कांग्रेस के लिए ‘स्वशासन की प्रयोगशाला’ बन गई है — अगर यह मॉडल सफल रहा, तो इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
गुटबाजी पर ‘सर्जिकल वार’
हरियाणा कांग्रेस की पुरानी बीमारी गुटबाजी अब किसी से छिपी नहीं है — कभी हुड्डा बनाम सैलजा, तो कभी सुरजेवाला बनाम अन्य।
राव नरेंद्र अब उसी जड़ता पर सर्जिकल वार कर रहे हैं। उनका फॉर्मूला साफ है —“कांग्रेस अब खबरों की नहीं, संगठन की पार्टी बनेगी।”
‘क्लीन-अप कोड’ का ऐलान
राव नरेंद्र की कार्यशैली में अब स्पष्टता और संयम दोनों हैं।उनका नया ‘क्लीन-अप कोड’ कहता है —“अब कांग्रेस में राय संगठन के भीतर दी जाएगी, मंचों या मीडिया में नहीं।”
यह कोड पार्टी के उस रवैये पर चोट है, जिसने कांग्रेस को ‘विवादों की पार्टी’ तो बना दिया, लेकिन ‘संयम की पार्टी’ नहीं बनने दिया था।
अब देखना होगा कि राव नरेंद्र का यह प्रयोग हरियाणा कांग्रेस को अनुशासन और एकजुटता की राह पर कितनी दूर तक ले जाता है।