फरीदाबाद | हरियाणा के फरीदाबाद जिले के दौलताबाद गांव में एक 24 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। आरोप है कि दहेज में कार की मांग पूरी न होने पर ससुरालवालों ने उसकी मारपीट कर हत्या कर दी। मृतका की पहचान प्रीति के रूप में हुई है, जिसकी शादी डेढ़ साल पहले धर्मेंद्र कुमार से हुई थी।
मृतका के पिता वीरेंद्र सिंह, निवासी मथुरा (उत्तर प्रदेश), ने ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने बेटी की शादी 6 मार्च 2024 को पूरे रीति-रिवाज और अपनी हैसियत से बढ़कर की थी। शादी में करीब 10-11 लाख रुपये खर्च किए गए थे, फिर भी ससुराल पक्ष कार की मांग को लेकर प्रीति को लगातार प्रताड़ित करता था।
शादी के बाद बढ़ा अत्याचार
वीरेंद्र सिंह ने बताया कि शादी के कुछ ही दिनों बाद बेटी ने बताया कि उसका पति, सास, ससुर, जेठ और जेठानी मिलकर उसे मारते-पीटते हैं और कहते हैं, “जब तक कार नहीं मिलेगी, घर नहीं रखेंगे।” पहली होली पर जब परिवार बेटी को लिवाने गया, तब भी झगड़ा हुआ था। प्रीति ने बताया था कि उसे फिर से मारपीट कर धमकाया गया।
एक लाख रुपये की मांग, ट्रांजैक्शन के सबूत भी मिले
कुछ समय पहले प्रीति ने एक बच्ची को जन्म दिया था। पिता के अनुसार, दामाद धर्मेंद्र ने फोन कर कहा — “अगर एक लाख रुपये नहीं दोगे तो इलाज नहीं कराऊंगा।” परिवार ने कई बार ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए — 3 फरवरी को ₹9,999, 22 मई को ₹20,000 और 6 अक्टूबर को ₹5,000 रुपये। इसके बावजूद दहेज की मांग बढ़ती रही।
30 अक्टूबर को हुई मारपीट, 2 नवंबर को मौत
परिजनों ने आरोप लगाया कि 30 अक्टूबर को धर्मेंद्र, ससुर वेदराम, जेठ मानसिंह, सास मोगन देवी और जेठानी सुनीता ने मिलकर प्रीति के साथ बर्बर मारपीट की। 31 अक्टूबर के बाद से उसका फोन बंद हो गया।
2 नवंबर की रात करीब तीन बजे सूचना मिली कि प्रीति की मौत हो गई है। परिवार जब दौलताबाद पहुंचा, तो बेटी मृत अवस्था में मिली।
पति गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी
ओल्ड फरीदाबाद थाना पुलिस ने पति धर्मेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे एक दिन की रिमांड पर भेजा गया है। थाना प्रभारी मदन सिंह ने बताया कि फिलहाल मामला दहेज हत्या (Section 304B IPC) के तहत दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में फांसी लगाने की बात सामने आई है, लेकिन परिजनों के आरोपों को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।