गाजा | जब गाजा युद्ध को लेकर यूरोप समेत कई लोकतांत्रिक देशों ने इजरायल से दूरी बना ली, तब भारत ने अपने पुराने सहयोगी का साथ मजबूती से थाम लिया। न केवल समर्थन जताया, बल्कि दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक रक्षा समझौता भी किया गया, जो भारत-इजरायल के सैन्य रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
मंगलवार को इजरायल रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रि.) अमीर बराम और भारतीय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुई ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बैठक के दौरान यह रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया गया। इस एमओयू का मकसद रक्षा, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत अपनी थल सेना के लिए इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) से मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (MR-SAM) लगभग 3.75 अरब डॉलर में खरीदेगा। साथ ही, IAI भारतीय वायुसेना के लिए 900 मिलियन डॉलर की लागत से छह वाणिज्यिक विमानों को एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर में बदलेगा।
बैठक के बाद मेजर जनरल बराम ने कहा, “भारत के साथ यह रणनीतिक संवाद बेहद महत्वपूर्ण है। हमारा सहयोग आपसी भरोसे और साझा सुरक्षा हितों पर टिका है। भारत हमारे लिए प्रथम श्रेणी का रणनीतिक साझेदार है, और हम इस साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब पश्चिमी देश इजरायल पर दबाव डाल रहे हैं, भारत का यह कदम न केवल तेल अवीव के साथ मजबूत मित्रता का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नई दिल्ली अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम है।
अमेरिकी रक्षा विश्लेषक जॉन स्पेंसर ने भी इस डील की सराहना करते हुए लिखा—“दो लोकतांत्रिक देशों का यह गठबंधन आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है।”
कारगिल युद्ध से लेकर अब तक भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध भरोसे, तकनीक और पारस्परिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। इस नए समझौते से भारत न केवल अपनी रक्षा क्षमता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पश्चिम एशिया में नए भू-राजनीतिक संतुलन की दिशा भी तय करेगा।