चंडीगढ़। हरियाणा की दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा (दयालु) योजना के लाभार्थियों को आर्थिक सहायता के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। योजना शुरू हुए डेढ़ साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन अब भी 35,500 से ज्यादा फाइलें लंबित पड़ी हैं। हैरानी की बात यह है कि मार्च 2024 तक की फाइलें भी अभी तक क्लियर नहीं हो सकी हैं, जबकि इस योजना की निगरानी की जिम्मेदारी स्वयं मुख्यमंत्री नायब सैनी के पास है।
पंचकूला मुख्यालय पर फाइलों का दबाव
फिलहाल दयालु योजना की फाइलों का निपटारा केवल पंचकूला स्थित मुख्य कार्यालय से किया जाता है।
यहां कर्मचारियों की भारी कमी है—
• केवल एक एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी की हाल ही में नियुक्ति हुई है
• सीमित स्टाफ फाइलों की स्कैनिंग और अपलोडिंग करता है
• प्रतिदिन 150–200 नई फाइलें प्राप्त होती हैं (लगभग 4,400 प्रति माह)
स्टाफ की कमी और लगातार बढ़ती पेंडेंसी के कारण नवंबर में भी मार्च की फाइलें निपटाई जा रही हैं।
सरकार करेगी व्यवस्था में बड़ा बदलाव
पेंडेंसी खत्म करने के लिए सरकार अब एक अहम बदलाव की तैयारी में है।
जल्द ही — जिला स्तर पर भी फाइलों को क्लियर करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इससे
• फाइलों की प्रोसेसिंग तेज होगी
• लंबित मामलों का निपटान कम समय में होगा
• लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी
यह योजना अप्रैल 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में शुरू की गई थी।
क्या है दयालु योजना?
दयालु योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को राहत देना है, जिनकी:
• वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक है
• और जो परिवार पहचान पत्र (PPP) में दर्ज हैं
योजना के तहत
• सड़क दुर्घटना
• असमय मृत्यु
• या 70% से अधिक की स्थायी विकलांगता
की स्थिति में परिवार को आयु के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
यह लाभ PMJJBY या PMSBY जैसी बीमा योजनाओं से मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त दिया जाता है।