जालंधर। शहर की वायु गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है और कई इलाकों में हवा ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी तक पहुँच गई है। उड़ती धूल, निर्माण कार्यों में लापरवाही और अधूरे प्रोजेक्ट शहरवासियों के लिए स्वास्थ्य संकट बन चुके हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, जुकाम और सांस संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर भर के डॉक्टर क्लीनिकों और मेडिकल स्टोर्स पर मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने की पुष्टि कर रहे हैं।
सड़कों पर फैली धूल से बढ़ी परेशानी
शहर में लंबे समय से चल रहे सरफेस वाटर प्रोजेक्ट के तहत करीब 60 किलोमीटर सड़कों की खुदाई हुई थी। पाइपलाइन डालने के बाद भी कई स्थानों पर मिट्टी के बड़े ढेर वैसे ही पड़े हैं। वाहनों की आवाजाही के दौरान यह मिट्टी उड़कर हवा में मिल जाती है और आसपास के इलाकों को भारी प्रदूषण की चपेट में ले रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि न तो नगर निगम और न ही प्रोजेक्ट संभालने वाली कंपनियों ने धूल को नियंत्रित करने के लिए कोई कदम उठाया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस बढ़ते संकट को रोकने में नाकाम नजर आ रहा है।
स्वास्थ्य जोखिम बढ़े — विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी
हवा में बढ़ती धूल और प्रदूषण के कारण:
- दमा और एलर्जी के मरीजों में दिक्कतें बढ़ी हैं
- बच्चों और बुजुर्गों में खांसी-जुकाम तेजी से फैल रहा
- सांस लेने में दिक्कत और छाती में जकड़न जैसे लक्षण आम हो गए
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दिनों में फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के मामले और बढ़ सकते हैं।
कैसे करें प्रदूषण से बचाव — विशेषज्ञों की सलाह
1. ज़रूरी न हो तो घर से बाहर न निकलें
- AQI ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ होने पर बाहर निकलने से बचें
- सुबह और शाम प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक रहता है
2. N95 या N99 मास्क पहनें
- साधारण मास्क धूल रोक नहीं पाते
- N95/N99 मास्क प्रदूषण के बारीक कणों को फेफड़ों में जाने से रोकते हैं
3. घर की हवा को साफ रखें
- एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें
- यदि उपलब्ध न हो तो घर में हल्की नमी बनाए रखें
- जब बाहर धूल ज्यादा हो, खिड़कियां बंद रखें
4. भाप और हर्बल स्टीम लें
- दिन में 1-2 बार भाप लें
- पुदीना, अजवाइन या यूक्लिप्टस की कुछ बूंदें मिलाएं
5. दमा के मरीज खास सावधानी बरतें
- इनमें इनहेलर/नेबुलाइजऱ हमेशा साथ रखें
- डॉक्टर की बताई दवाएं समय पर लें
- किसी भी दवा में बदलाव खुद न करें
6. घर में योग और प्राणायाम करें
- अनुलोम-विलोम और दीप श्वास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं
- केवल साफ हवा वाले कमरे में ही करें
7. धुएं से दूर रहें
- सिगरेट का धुआं
- रसोई गैस का धुआं
- अगरबत्ती व धूप का धुआं
- घर की साफ-सफाई करते समय भी मास्क जरूर पहनें
कब डॉक्टर के पास जाएं
यदि आपको—
- लगातार खांसी
- सीने में भारीपन
- सांस लेने में दिक्कत
- रात में बार-बार घुटन
जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।