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हरियाणा कॉलेजों की पीयू मान्यता बहाली का मुद्दा अमित शाह तक पहुँचा

पंचकूला। हरियाणा के कॉलेजों को चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी से दोबारा एफिलिएशन दिलाने का मुद्दा अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास पहुँच गया है। शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव विजय बंसल ने इस संबंध में गृह मंत्री को पत्र भेजकर पंचकूला और अंबाला जिलों के कॉलेजों को पुनः पंजाब यूनिवर्सिटी से जोड़ने की मांग उठाई है।

इसके साथ ही बंसल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी आग्रह किया है कि वे 17 नवंबर को फरीदाबाद में अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली नॉर्दर्न जोनल काउंसिल (NZC) की बैठक में यह मुद्दा मजबूती से उठाएँ। उन्होंने याद दिलाया कि 9 जुलाई 2022 को जयपुर में हुई NZC बैठक में भी हरियाणा इस विषय को जोरदार तरीके से रख चुका है, लेकिन पंजाब सरकार ने इसका कड़ा विरोध किया था।

1976 तक पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े थे हरियाणा के कई कॉलेज

विजय बंसल के अनुसार, 1 नवंबर 1976 तक हरियाणा के कई कॉलेज पंजाब यूनिवर्सिटी से संबद्ध थे। बाद में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा की बराबर की हिस्सेदारी होने के बावजूद प्रदेश के कॉलेजों को पुनः एफिलिएशन नहीं दिया जा रहा, जबकि यह पंचकूला और अंबाला के छात्रों के उच्च शिक्षा के अधिकार से सीधा जुड़ा मामला है।

बंसल ने तर्क दिया कि पंजाब यूनिवर्सिटी में देशभर से प्रतिभाशाली छात्र पढ़ते हैं। यदि हरियाणा के छात्र भी उनसे प्रतिस्पर्धा करेंगे तो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता और अवसर दोनों बढ़ेंगे।

हरियाणा का हिस्सा कभी 4% था, लेकिन विवाद के बाद खत्म कर दिया गया

उन्होंने बताया कि पहले पंजाब यूनिवर्सिटी की हिस्सेदारी में 92% केंद्र सरकार, 4% हरियाणा, और 4% पंजाब का योगदान था। लेकिन एक कार्यक्रम में विवाद होने के बाद तत्कालीन बंसीलाल सरकार ने हरियाणा का हिस्सा वापस ले लिया। इसके बाद ही कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई।

हिस्सेदारी खत्म होने से हरियाणा की यूनिवर्सिटी की सीनेट सदस्यता भी समाप्त हो गई। जबकि सीनेट ही यूनिवर्सिटी के महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। अगर हिस्सेदारी बहाल होती है तो मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी सीनेट में शामिल हो सकते हैं।

अब हरियाणा 20 करोड़ रुपये तक देने को तैयार, लेकिन पंजाब की मंजूरी अटकी

हिस्सेदारी खत्म होने के बाद हरियाणा ने फंड देना भी रोक दिया था। अब राज्य सरकार 8 करोड़ की जगह 20 करोड़ रुपये तक का वार्षिक योगदान देने को तैयार है। इस संबंध में हरियाणा सरकार कोर्ट में शपथपत्र भी जमा कर चुकी है।

लेकिन चूँकि पंजाब यूनिवर्सिटी का पेरेंट स्टेट पंजाब है, इसलिए अंतिम मंजूरी पंजाब सरकार के पास ही है। विजय बंसल का कहना है कि पंजाब सरकार सहमति नहीं दे रही, जिससे मामला वर्षों से अटका हुआ है।

Karuna

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