सोनीपत। हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में कठोर कार्रवाई करते हुए गोहाना के तहसीलदार जीवेंद्र मलिक को उनके पद से हटाकर नायब तहसीलदार बना दिया है। विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद यह निर्णय रूल-7 के तहत लिया गया। सरकार ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि जीवेंद्र मलिक अब सेवानिवृत्ति तक नायब तहसीलदार के पद पर ही कार्य करेंगे।
रिश्वत प्रकरण में पहले हो चुकी है सजा
सूत्रों के अनुसार, पटवारी रहते हुए जीवेंद्र मलिक को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। यह मामला इस समय हाईकोर्ट में अपील के रूप में लंबित है। इसी प्रकरण को आधार बनाकर विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है।
कई जिलों में महत्वपूर्ण तैनाती, लंबे समय से अवकाश पर थे
जीवेंद्र मलिक इससे पहले गुरुग्राम, सोनीपत, खरखोदा और गोहाना जैसे अहम स्थानों पर तैनात रहे हैं। वर्तमान में वह गोहाना के तहसीलदार पद पर नियुक्त थे, लेकिन जानकारी के अनुसार वह काफी समय से लगातार अवकाश पर चल रहे थे और दफ्तर में उपस्थिति नहीं दे रहे थे। बताया जाता है कि उनका पुत्र भी गुरुग्राम में नायब तहसीलदार के पद पर कार्यरत है।
राजस्व मंत्री का कड़ा संदेश: भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि राज्य सरकार ‘‘जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन’’ नीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा: “कानून से ऊपर कोई नहीं। जिन कर्मचारियों पर आरोप साबित होते हैं, उन पर कार्रवाई अनिवार्य है।” सरकार के इस कदम को प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।