फरीदाबाद | फरीदाबाद स्थित अल फला यूनिवर्सिटी पर मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी मान्यता और सैकड़ों करोड़ रुपये की वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है। उन्हें अदालत ने तेरह दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यूनिवर्सिटी प्रशासन अभिभावकों को फर्जी मान्यता दिखाकर करोड़ों रुपये वसूलता रहा और इन पैसों को अवैध तरीके से ट्रांसफर किया गया।
ईडी को 415 करोड़ रुपये की अनियमितताओं के संकेत
ईडी की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अल फला यूनिवर्सिटी और उसे नियंत्रित करने वाला ट्रस्ट वर्ष 2014 से 2025 के बीच लगभग 415.10 करोड़ रुपये के वित्तीय लेनदेन को गलत तरीके से स्वैच्छिक चंदा और शैक्षिक प्राप्तियों के रूप में दिखाता रहा। ईडी का कहना है कि यह राशि संदिग्ध स्रोतों से जुटाई गई है और इसे मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया।
जवाद सिद्दीकी की गिरफ्तारी और रिमांड क्यों जरूरी
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में कहा कि यूनिवर्सिटी की फीस संरचना, डोनेशन, फंड फ्लो, बेनामी संपत्तियों और अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए सिद्दीकी को कस्टडी में रखना अत्यंत आवश्यक है। ईडी ने यह भी बताया कि सिद्दीकी का यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट पर सीधा प्रभाव है। यदि उन्हें रिमांड पर नहीं भेजा जाता तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और मामले की दिशा प्रभावित हो सकती है।
टेरर लिंक का भी खुलासा
यह मामला केवल आर्थिक हेराफेरी तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान अल फला यूनिवर्सिटी का संबंध एक बड़े आतंकी मॉड्यूल से भी सामने आया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने दस नवंबर को यूनिवर्सिटी से जुड़े कई संदिग्धों के पास से विस्फोटक सामग्री बरामद की थी। इसके बाद दिल्ली के लाल किले के सामने हुए धमाके की जांच में भी यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों की भूमिका के संकेत मिले। पूरे मामले को देखते हुए गृह मंत्रालय ने जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी है।
ईडी की कार्रवाई जारी
ईडी ने चौदह नवंबर को अल फला ग्रुप के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज किया था। तभी से एजेंसी बैंक खातों, लेनदेन, संपत्ति और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। जांच अधिकारियों का दावा है कि मामले से जुड़े और भी बड़े खुलासे आने बाकी हैं और जल्द ही कई और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं।