लुधियाना। जीएसटी और वैट के लंबित रिफंड को लेकर पंजाब के व्यापारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि पिछले 7–8 महीनों से मामला सरकार के सामने कई बार रखने के बावजूद भी रिफंड जारी नहीं किए गए।
सूत्रों के अनुसार अगस्त माह में केवल 220 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि लगभग 650 करोड़ रुपये अभी भी लंबित हैं।
व्यापारियों ने यह मुद्दा कई बार लुधियाना DTC रणधीर कौर के सामने भी उठाया था, जिन्होंने पोर्टल अपग्रेड पूरा होने के बाद रिफंड जारी करने का भरोसा दिया था। इसी तरह, पंजाब ट्रेड कमीशन के अध्यक्ष अनिल ठाकुर के दौरे के दौरान भी व्यापारिक संगठनों ने इस समस्या को विस्तार से रखा था, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला।
व्यापारियों का आरोप – सरकार उदासीन, कारोबारी माहौल लगातार बिगड़ रहा
व्यापार मंडलों का कहना है कि पंजाब में व्यापार पहले ही मंदी और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा रिफंड रोके जाने से कारोबारी माहौल और खराब हो रहा है तथा निवेशक पंजाब से दूर जा रहे हैं।
पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मेहरा ने कहा— “यदि जल्द रिफंड जारी नहीं किए गए तो हम राज्यभर में बड़े धरने के लिए मजबूर होंगे। जल्द ही व्यापारियों की राज्यस्तरीय बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।”
लुधियाना के व्यापारी राजेश ढांडा का कहना है कि “650 करोड़ रुपए का लंबित रिफंड छोटे व्यापारियों की रीढ़ तोड़ रहा है। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
व्यापारी विवेक वर्मा ने कहा कि “पंजाब में निवेशक विश्वास पहले ही कमजोर है। रिफंड में देरी से बिज़नेस माहौल और खराब हो रहा है। सरकार को तेज़ और पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए।”
छोटे उद्यमियों की परेशानी बताते हुए विवेक जिंदल ने कहा—“रिफंड ही व्यापारियों की कैपिटल है। यदि पैसा ही अटका रहेगा तो कारोबार कैसे चलेगा?”
एस.एस. खुराना ने चेतावनी दी— “यदि सरकार ने समय पर रिफंड जारी नहीं किए, तो उद्योगों का पलायन और तेज़ होगा। कई यूनिट पहले ही बंद हो चुकी हैं।”