इंडोनेशिया I इंडोनेशिया लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। पिछले एक महीने में देश में 1400 से ज्यादा भूकंप दर्ज किए गए हैं। 27 नवंबर 2025 को सुमात्रा के पास एक बार फिर 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप महसूस किया गया। अचानक जमीन हिलते ही लोग घरों और इमारतों से बाहर निकल आए, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। राहत की बात यह है कि अभी तक बड़े नुकसान या जनहानि की कोई पुष्टि नहीं है, लेकिन रोज़ाना आने वाले झटकों ने लोगों का भय बढ़ा दिया है।
सिर्फ भूकंप ही नहीं, बाढ़ और भूस्खलन ने भी कई गांवों में जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है और राहत कार्य लगातार जारी हैं।
इंडोनेशिया में इतने अधिक भूकंप क्यों आते हैं?
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है—जो दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। यहां लगभग 15 टेक्टॉनिक प्लेटें एक-दूसरे से टकराती रहती हैं, जिसके कारण दुनिया के 90% से अधिक भूकंप इसी क्षेत्र में दर्ज किए जाते हैं। यही कारण है कि इंडोनेशिया में हजारों भूकंप आना सामान्य है।
सुमात्रा में झटके अधिक क्यों महसूस हो रहे हैं?
सुमात्रा द्वीप के नीचे हिंद-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और यूरेशियन प्लेट लगातार एक-दूसरे के नीचे धंस रही हैं। यह प्रक्रिया अत्यधिक दबाव बनाती है और दबाव के अचानक मुक्त होते ही भूकंप आता है।
इसके अलावा, यहां मौजूद ग्रेट सुमात्रा फॉल्ट भी बड़े झटकों का प्रमुख कारण है। हाल के दिनों में आए 6.6 और 6.3 तीव्रता के झटके इसी भू-दरार से जुड़े हैं।
2004 की विनाशकारी सुनामी की यादें फिर ताज़ा
सुमात्रा क्षेत्र ने 2004 में दुनिया का सबसे शक्तिशाली समुद्री भूकंप झेला था जिसकी तीव्रता 9.1 थी। इस भूकंप से आई सुनामी में 2.30 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
हालिया भूकंप सिर्फ 10 किलोमीटर की सतही गहराई पर दर्ज हुआ, जिससे जमीन जोर से हिली, लेकिन सुनामी की आशंका नहीं रही।
बाढ़ और भूस्खलन से हालात और बदतर
सुमात्रा में चक्रवात ‘सेन्यार’ के चलते भारी बारिश हो रही है।
अब तक:
- 25 से अधिक मौतें
- 10 लोग लापता
- 8000+ लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए
- कई घर बह गए, सड़कें टूट गईं
- कई गांव पानी और मलबे में पूरी तरह डूबे
लगातार भूकंपों के डर से लोग अपने घरों में लौटने से भी हिचक रहे हैं।
आने वाले दिनों के लिए वैज्ञानिकों की चेतावनी
वैज्ञानिकों और मौसम विभाग का कहना है कि आगे भी और झटके आने की संभावना है। बारिश के और तेज होने की भी आशंका है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति और खराब हो सकती है। सरकार हेलीकॉप्टरों के माध्यम से राहत सामग्री भेज रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब प्राकृतिक आपदाएँ पहले से अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं।