चंडीगढ़ | हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन ने नई विधानसभा भवन के लिए भूमि सौदे को फिलहाल स्थगित कर दिया है। गृह मंत्रालय ने दोनों पक्षों को आगे बढ़ने से रोकते हुए इस विवादित प्रस्ताव पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ में विधानसभा भवन के निर्माण के लिए दस एकड़ जमीन खरीदने का निर्णय वापस ले लिया है। इससे पहले अदला-बदली की नीति के तहत हरियाणा ने सकेतड़ी क्षेत्र में 12 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव रखा था, ताकि रेलवे स्टेशन के पास की प्राइम लोकेशन वाली भूमि हासिल की जा सके। हालांकि इस योजना में प्रशासनिक और शहरी नियोजन संबंधी बाधाओं के कारण संतोषजनक समाधान नहीं निकला।
यूटी प्रशासन ने हरियाणा को दस एकड़ जमीन के लिए 640 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा था। अदला-बदली की नीति का लाभ न मिल पाने और भूमि की कीमत बढ़ने के कारण यह प्रस्ताव अब फिलहाल समाप्त माना जा रहा है। भूमि की लोकेशन और शहरी योजना दृष्टिकोन से दोनों स्थलों में समानता नहीं होने के कारण भी प्रस्ताव खारिज किया गया।
हरियाणा विधानसभा की वर्तमान भवन में 90 विधायकों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। मौजूदा भवन एक हैरिटेज संरचना होने के कारण इसका विस्तार संभव नहीं है। इसलिए नया विधानसभा भवन बनाना आवश्यक था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई 2022 में एनजेडसी की बैठक में नई बिल्डिंग के लिए भूमि देने का प्रस्ताव मंजूर किया था। वर्ष 2026 में प्रस्तावित परिसीमन के बाद 2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होंगे। नए परिसीमन के अनुसार हरियाणा में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 126 और लोकसभा सीटें 14 होंगी।
इस विवाद में पंजाब और हिमाचल प्रदेश भी चंडीगढ़ पर अपने दावे पेश कर चुके हैं। भूमि विवाद के कारण हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन ने फिलहाल विधानसभा निर्माण के प्रस्ताव को रोक दिया है।