Mandi, Dharamveer-:क्या आप कभी सोच सकते हैं कि छाछा बेचकर भी पैसे कमाए जा सकते हैं। वो छाछा जो हिमाचल प्रदेश में गलगल से बनता है और सर्दियों के मौसम में लोग दिन की धूप में इसे बनाकर खाना पसंद करते हैं। लेकिन इसी छाछे को मंडी की दो महिलाओं ने रोजगार का माध्यम बना दिया। सिड्डू को मोमो के पापा के रूप में इंट्रोडयूज करने वाली मंडी शहर निवासी अंजना और अंजू ने दिल्ली में इस बार छाछे को इंट्रोडयूज किया।
दिल्ली में नासवी यानी नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्ट्रीट वेंडर्स ऑफ इंडिया की तरफ से फूड फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मंडी शहर निवासी अंजना और अंजू ने भी यहां के पारंपरिक फूड का स्टॉल लगाया हुआ है।अंजू ने बताया कि सिड्डू, कचौरी और शिरा के साथ उन्होंने छाछा खिलाने का पहले से ही सोच लिया था। इसके लिए वे अपने साथ 25 किलो गलगल भी ले गई थी। जब उन्होंने इसे बनाकर लोगों को खिलाना शुरू किया तो लोगों को इसका स्वाद बहुत ज्यादा पसंद आया और लोग बड़ी संख्या में इसे खाने के लिए पहुंचे। छाछा उन्होंने 100 रूपए प्रति डोना की दर से बेचा और अच्छी आजीविका कमाई।अंजू ने बताया कि अगर उन्हें पता होता कि लोगों को यह इतना ज्यादा पसंद आना है तो वे अपने साथ और ज्यादा गलगल ले जाती क्योंकि जो ले गए थे वो सभी खत्म हो गए।
जो भी लोग अंजना और अंजू के स्टाल पर पहुंचे उन्होंने खूब चटकारे लगाकर छाछा खाया और अपने अनुभवों को भी सांझा किया। लोगों ने बताया कि यह उनके लिए एक नये स्वाद का अनुभव था जो उन्हें बहुत ज्यादा पसंद आया। लोगों को इस बात को लेकर ज्यादा संतोष देखने को मिला कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक और स्वादपूर्ण है। दिल्ली में जो हिमाचली लोग रह रहे हैं उन्हें भी छाछा खाकर अपने घर की याद आ गई।
जानिए क्या है छाछा
छाछा गलगल की एक खट्टी-मिठी और तीखी चाट होती है। इसे पहाड़ों में सर्दियों के मौसम में दिन की धूप में खूब खाया जाता है। गलगल के छोटे-छोटे पीस करके उसमें मिर्ची, धनिया और पालक की चटनी और थोड़ी सी चीनी के साथ मिक्स करके बनाया जाता है।