Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार न केवल मनरेगा योजना के नाम में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है, बल्कि इसके संचालन के तरीके में भी ऐसे परिवर्तन किए जा रहे हैं, जो इस योजना की मूल भावना के खिलाफ हैं।
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजनाओं को स्वीकार नहीं कर पा रही है। इसी कारण संसद में मनरेगा का नाम बदलने से संबंधित बिल लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कांग्रेस सरकारों द्वारा शुरू की गई कई जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलने में लगी हुई है, लेकिन केवल नाम बदलना ही नहीं, बल्कि योजनाओं की कार्यप्रणाली को भी कमजोर किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रच रही है। पिछले वर्ष लगभग 14 हजार करोड़ रुपये के कार्य मनरेगा के तहत किए गए थे, लेकिन अब यह अधिकार केंद्र ने अपने हाथ में ले लिया है कि किस राज्य में किस मौसम के दौरान काम मिलेगा। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार ने राज्यों में फसलों के मौसम के आधार पर भी काम की सीमा तय कर दी है।
अनिरुद्ध सिंह ने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य के मैदानी इलाकों में तराई क्षेत्र में साल में तीन बार फसलें ली जाती हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में सेब की खेती से जुड़े कार्य पूरे वर्ष चलते रहते हैं। ऐसे में यदि फसल के नाम पर मनरेगा का काम रोका जाएगा, तो ग्रामीणों को रोजगार कैसे मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों को समय पर धनराशि नहीं देना चाहती, इसलिए इस तरह के बहाने बनाए जा रहे हैं।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में बेरोजगारी बढ़ेगी। जो लोग खेती के माध्यम से स्वरोजगार में लगे हैं, वे भी बेरोजगार हो सकते हैं और मजदूरी पर निर्भरता बढ़ेगी।इससे पहले पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र में पहले आधार सेवा केंद्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य आम जनता को एक ही स्थान पर आधार से संबंधित सभी सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें और उन्हें सुविधा मिल सके।