चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य को देश का सबसे विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सरकार ने भूमि और संपत्ति रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस कर दिया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
मंगलवार को संत कबीर कुटीर में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में पहले से कहीं अधिक ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ जनकल्याण के कार्यों में जुटी है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के दौर से चली आ रही आबियाना प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरस्वती आर्द्रभूमि जलाशय और सरस्वती जंगल सफारी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं न केवल प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में सहायक होंगी, बल्कि पर्यटन के नए अवसर भी सृजित करेंगी।
शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी राज्य सरकार लगातार निवेश कर रही है। उमरी में 108 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर भारत के पहले राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा 14.51 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय पॉलिटेक्निक भवन और बहलोलपुर में 8.33 करोड़ रुपये की लागत से आईटीआई का निर्माण पूरा किया गया है।
सामाजिक समरसता और समानता के मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से गांव उमरी में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से संत शिरोमणि गुरु रविदास स्मारक का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों का जिक्र करते हुए बताया कि पिछले 11 वर्षों में फसल खराब होने की स्थिति में मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 15,448 करोड़ रुपये की सहायता राशि किसानों को प्रदान की जा चुकी है।
अंत में उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर हरियाणा को देश का सबसे विकसित राज्य बनाने के संकल्प को साकार करें।