चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी ने कहा है कि समय पर सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रशिक्षण मिलने से हजारों अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने यह बात स्वर्गीय स्वदेश भंडारी की पुण्य स्मृति में सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित विशाल सीपीआर प्रशिक्षण शिविर और 201 कुंडीय महायज्ञ के दौरान कही। यह आयोजन वैदिक विधि-विधान से देश के विख्यात संतों के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिसने समाज को सेवा, संस्कार और मानवता का संदेश दिया।
मीडिया से बातचीत में तरुण भंडारी ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जिस स्थान पर आज कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसी जगह उनके पिता के साथ हृदयाघात की घटना हुई थी। उस समय सैकड़ों लोग मौजूद थे, लेकिन किसी को यह जानकारी नहीं थी कि मरीज को तुरंत कैसे बचाया जाए। इसी घटना ने उन्हें सीपीआर प्रशिक्षण को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां आबादी करीब 140 करोड़ है, कम से कम हर घर में एक व्यक्ति को सीपीआर की जानकारी होनी चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी हृदयाघात पीड़ित को लगातार सीपीआर देते हुए अस्पताल तक पहुंचाया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच के साथ सुदेश भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई।
तरुण भंडारी ने बताया कि अब तक ट्रस्ट की ओर से लगभग 500 सीपीआर प्रशिक्षण शिविर लगाए जा चुके हैं, जिनके माध्यम से करीब 50 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। उन्होंने विदेश में एक विदेशी नागरिक को स्वयं सीपीआर देकर बचाने का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने चिंता जताई कि आज के समय में युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सीपीआर का ज्ञान हर नागरिक के लिए आवश्यक हो गया है।
उन्होंने आगे कहा कि पहले यह अभियान पूरे हरियाणा में चलाया गया और अब प्रदेश के सभी 23 जिलों में इसकी समितियां गठित की जा रही हैं। लक्ष्य है कि अगले एक वर्ष में प्रदेश की करीब 20 प्रतिशत आबादी को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया जाए और लगभग 5,000 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं।
तरुण भंडारी ने इस जन-जागरूकता अभियान में मीडिया की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से यह संदेश लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने जीवन में सीपीआर प्रशिक्षण अवश्य लें, क्योंकि दूसरों की जान बचाना ही सच्चे नागरिक होने की पहचान है।