बाढडा। उपमंडल के गांव गोपी में करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन हड़पने के लिए फर्जी वसीयतनामा तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आने के बाद पुलिस ने तत्कालीन कानूनगो, पटवारी और नंबरदार समेत 10 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
गांव गोपी निवासी कृष्ण कुमार (वर्तमान निवासी गुडाना) और राजस्थान के जैतपुर निवासी रमेश कुमार ने पुलिस अधीक्षक दादरी को शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनके पूर्वजों—पिता पूर्ण, चाचा सुबराम और दादी छन्नी देवी—के नाम गांव गोपी में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन दर्ज थी। आरोप है कि उक्त जमीन को हड़पने के लिए आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी वसीयतनामा तैयार किया।
जांच के दौरान सामने आया कि 22 दिसंबर 2022 को पटवारी रविंद्र ने इंतकाल की तस्दीक की, जबकि उस दिन वह गांव गोपी में तैनात ही नहीं था। इसी तरह, 5 जनवरी 2023 को गिरदावर अवतार द्वारा दस्तावेजों की तस्दीक की गई, जबकि उस समय वह गोपी गांव का कानूनगो नहीं था।
डीसी दादरी के आदेश पर जिला परिषद के सीईओ को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। 29 अक्टूबर 2025 को सौंपी गई जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष चौंकाने वाले बताए गए हैं। एक्सपर्ट रिपोर्ट में मृतक पूर्ण पुत्र खूबीराम के अंगूठे के निशान का वसीयत पर मौजूद निशान से मिलान नहीं हुआ। वहीं, रमेश कुमार के पिता सुबराम, जो भारतीय सेना में थे, हमेशा अपना नाम ‘सुबराम’ लिखते थे, जबकि फर्जी वसीयत में उनका नाम ‘शुभराम’ दर्शाया गया है। इसके अलावा, यह वसीयतनामा किसी सक्षम राजस्व अधिकारी के कार्यालय से पंजीकृत भी नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया कि इंतकाल नंबर 1349, 1350 और 1351 फरवरी 2022 में दर्ज किए गए थे, उस समय पटवारी अजीज अहमद तैनात थे, जिन्होंने इनकी तस्दीक नहीं की थी। बाद में, पद पर न रहते हुए भी पटवारी रविंद्र द्वारा हस्ताक्षर किए गए। जिस दिन गिरदावर अवतार ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, उस दिन गांव का कानूनगो कपूर सिंह था और वह कार्यालय में उपस्थित था। मृतकों के वसीयतनामों की छाया प्रतियों को एक वकील से सत्यापित कराया गया, जबकि अधूरे वारिसान नंबरदार फतेह सिंह द्वारा प्रमाणित किए गए।
पुलिस ने इस मामले में जगदीश, रतीराम (एवं वारिसान), तत्कालीन पटवारी रविंद्र कुमार, सेवानिवृत्त गिरदावर अवतार, नंबरदार फतेह सिंह, हरिओम, पारस और मनिंद्र के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी दिव्यांग होने के कारण अभी जांच में शामिल नहीं हो सका है। मामले की जांच जारी है।