Dharamshala, Rahul-:आईजीएमसी शिमला में मरीज से मारपीट के आरोप में एक डॉक्टर को बर्खास्त किए जाने के विरोध में शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश भर के डॉक्टर एक दिवसीय मास कैजुअल लीव पर रहे। इस फैसले का असर कांगड़ा जिला के जोनल अस्पताल धर्मशाला में भी साफ तौर पर देखने को मिला, जहां ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं।
जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचे, जिन्हें मजबूरन आपातकालीन सेवाओं के माध्यम से उपचार करवाना पड़ा।हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दावा किया कि मरीजों को कम से कम परेशानी हो,इसके लिए इमरजेंसी सेवाएं सुचारू रूप से चलाई गईं और गंभीर मरीजों का इलाज प्राथमिकता के आधार पर किया गया। इसके बावजूद ओपीडी बंद रहने से आम मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई मरीज बिना इलाज के ही लौटने को मजबूर हुए।जोनल अस्पताल धर्मशाला के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील भट्ट ने बताया कि हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने यह एक दिवसीय मास कैजुअल लीव ली है।उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर के साथ हुए कथित अभद्र व्यवहार और उसके बाद की कार्रवाई के विरोध में यह कदम उठाया गया है।
डॉ. भट्ट ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं अस्पताल की पहली प्राथमिकता हैं, इसी कारण आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह चालू रखा गया।उन्होंने बताया कि इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों की जांच की जा रही है और इसके लिए अतिरिक्त डॉक्टरों की भी तैनाती की गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल के सभी डॉक्टर अलर्ट मोड पर हैं।डॉ. सुनील भट्ट ने आगे कहा कि एक दिवसीय मास कैजुअल लीव के बाद ज्वाइंट एक्शन फोरम, टैमकोट और सीनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार और उच्च अधिकारियों से आग्रह किया कि इस पूरे मामले का शीघ्र समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में डॉक्टरों के आंदोलन की स्थिति न बने और मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।