नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा रद्द कर दी है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की परिस्थितियों, पक्षों के व्यवहार और वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और बातचीत के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध सहमति से थे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी, पीड़िता और दोनों परिवारों से बातचीत की। अदालत को बताया गया कि दोनों ने अब विवाह कर लिया है और सामान्य, खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इन तथ्यों को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने न केवल आरोपी को राहत दी, बल्कि पूरे मामले को समाप्त करने का आदेश भी दिया।
नौ महीने बाद आया अंतिम निर्णय
यह मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा है, जहां आरोपी जेल में बंद था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मार्च 2025 में इस मामले में नोटिस जारी किया था। करीब नौ महीने की सुनवाई प्रक्रिया के बाद दिसंबर में अंतिम फैसला सुनाया गया। इससे पहले अदालत के निर्देश पर आरोपी को पुलिस सुरक्षा में सुप्रीम कोर्ट लाया गया था।
हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
इससे पहले हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा निलंबन की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने इसे एक असाधारण मामला बताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों पक्ष साथ रह सकते हैं और विवाद को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है।
जमानत के बाद हुआ विवाह
कोर्ट ने जुलाई में जमानत याचिका स्वीकार की थी, जिसके बाद आरोपी और पीड़िता ने विवाह कर लिया। बाद की सुनवाई में जब यह सामने आया कि दोनों स्थिर और शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं, तो सुप्रीम कोर्ट ने केस को पूरी तरह रद्द करने का फैसला सुनाया।