अंबाला | हरियाणा के अंबाला शहर के नदी मोहल्ला से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक तीन साल तक बंद कमरे में मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करता रहा। 24 वर्षीय प्रिंस, जो कपड़ा मार्केट में काम करता था, गंभीर बीमारी से जूझता रहा, लेकिन परिजनों ने इलाज की जगह अंधविश्वास को तरजीह दी। यही जिद आखिरकार उसकी मौत का कारण बन गई।
बताया जा रहा है कि करीब तीन साल पहले प्रिंस की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। शुरुआत में परिजनों ने इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज किया। हालत बिगड़ने पर जब उसके हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया, तब भी उसे डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय झाड़-फूंक के सहारे ठीक करने की कोशिश की गई। समय के साथ प्रिंस पूरी तरह बेड पर आ गया।
करीब दो साल पहले परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन इलाज अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बाद युवक को घर के एक अलग कमरे में बंद कर दिया गया। पड़ोसियों के अनुसार, जब भी कोई मदद के लिए आगे आता, परिजन उसे घर में घुसने नहीं देते थे। उनका कहना होता था कि झाड़-फूंक से ही प्रिंस ठीक हो जाएगा।
धीरे-धीरे प्रिंस की हालत बेहद खराब होती चली गई। शरीर सूखकर हड्डियों का ढांचा बन गया, खाने-पीने की हालत नहीं रही। कमरे में गंदगी फैली हुई थी और आसपास बदबू रहती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि युवक को पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जाता था।
इस मामले की जानकारी वंदे मातरम दल तक पहुंची। संगठन के संस्थापक सदस्य भरत सिंह ने बताया कि एक वीडियो देखने के बाद उन्हें सूचना मिली। जब टीम प्रिंस के घर पहुंची तो परिजनों ने बात करने से मना कर दिया। किसी तरह घर के अंदर जाने पर जो दृश्य दिखा, वह बेहद भयावह था। युवक बेहद कमजोर हालत में पड़ा था, नाखून बढ़े हुए थे और शरीर पर कीड़े तक रेंग रहे थे।
दल शुक्रवार को युवक को रेस्क्यू करने वाला था, लेकिन इससे पहले ही वीरवार रात प्रिंस की मौत हो गई। शुक्रवार को शव का जिला नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार युवक के फेफड़ों में गंभीर समस्या थी।
चौकी प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि परिजनों की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि अंधविश्वास और लापरवाही किस तरह इंसानी जान पर भारी पड़ सकती है।