चंडीगढ़ | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वीर साहिबजादों का सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव देशभक्ति, साहस और धर्मनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा। इसी भावना को सम्मान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहिबजादों के शहीदी दिवस को हर वर्ष “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को सिरसा स्थित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह की शहादत को समर्पित राज्यस्तरीय वीर बाल दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने संगत के साथ पंगत में बैठकर लंगर भी ग्रहण किया। इस अवसर पर सैंड आर्ट के माध्यम से चारों साहिबजादों के बलिदान की शौर्यगाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
पंजाबी भाषा में संबोधन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरसा की ऐतिहासिक धरती पर वीर बाल दिवस जैसे गौरवपूर्ण आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म, राष्ट्र और मानवता की रक्षा के लिए जो बलिदान दिए, वे भारतीय इतिहास में अद्वितीय हैं। मात्र सात और नौ वर्ष की आयु में साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह ने जिस दृढ़ता के साथ अत्याचार के आगे झुकने से इनकार किया, वह आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार के बलिदानों की कथा जितनी बार सुनी और पढ़ी जाएगी, उतनी ही बार देश और समाज के लिए सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार गुरु साहिबान की शिक्षाओं और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर पूरे प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे समाज में बलिदान और सत्य के प्रति चेतना का संचार हुआ।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि इतिहास में ऐसा उदाहरण विरले ही मिलता है, जब मासूम बच्चों ने धर्म की रक्षा के लिए दीवारों में जिंदा चिनवाया जाना स्वीकार किया, लेकिन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। माता गुजरी कौर का त्याग और साहस आज की पीढ़ी, विशेषकर माताओं और बहनों के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि वीरता उम्र की मोहताज नहीं होती, यह साहिबजादों ने सिद्ध कर दिखाया।
मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि यमुनानगर के कलेसर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर वन विकसित किया गया है और द्वार का निर्माण किया गया है। सिरसा विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर चेयर स्थापित की गई है। साथ ही, 1984 के दंगों में प्रभावित 121 सिख परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। तीर्थ यात्रियों के लिए स्वर्ण जयंती गुरु दर्शन यात्रा योजना भी शुरू की गई है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यस्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 3450 स्कूलों के लगभग छह लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कीर्तन, कविता पाठ और सैंड आर्ट के माध्यम से साहिबजादों की गाथा प्रस्तुत की गई।
इस अवसर पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जगदीश झींडा और संत बलजीत सिंह दादूवाल ने मुख्यमंत्री की पहल की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने सिख इतिहास और गुरुओं के बलिदान को सम्मान देने का अनुकरणीय कार्य किया है।