ठाणे | ठाणे नगर निगम चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य में सत्ता की सहयोगी पार्टियां भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना इस बार एक सुर में नजर नहीं आ रहीं। दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, जिससे गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच सीटों के तालमेल को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसका असर ठाणे नगर निगम चुनाव के प्रचार में साफ दिखाई देने लगा है। भाजपा ने पूरे शहर में ‘नमो भारत, नमो ठाणे’ के नारे के साथ अपने बैनर और पोस्टर लगा दिए हैं, वहीं शिवसेना ने भी स्वतंत्र रूप से चुनावी अभियान शुरू कर दिया है।
ठाणे को एकनाथ शिंदे का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, ऐसे में भाजपा का अलग प्रचार करना शिवसेना के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि दोनों दल गठबंधन के बिना चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो इसका सीधा असर शिवसेना के परंपरागत वोट बैंक पर पड़ सकता है और मुकाबला और भी दिलचस्प हो जाएगा।
फिलहाल भाजपा और शिवसेना की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, जबकि चुनाव में समय भी कम बचा है। ऐसे में अलग-अलग रणनीति अपनाना दोनों दलों के लिए जोखिम भरा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भाजपा स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती है तो यह शिंदे गुट के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है और महाराष्ट्र की सियासत में नए समीकरण उभर सकते हैं।
इस बीच सभी की नजरें आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों पर भी टिकी हैं। 15 जनवरी को होने वाले इन चुनावों के नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। देश की सबसे समृद्ध नगरपालिकाओं में शामिल BMC पर कब्जा करने के लिए सभी प्रमुख दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सहयोगी दलों के खिलाफ कोई आपत्तिजनक बयान न दिया जाए। उन्होंने शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी को लेकर संयम बरतने की हिदायत भी दी थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर दिख रही दूरी ने गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।