Una, Rakesh-:महाल बंदोबस्त को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष देखने को मिला। किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के नेतृत्व में सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और बंदोबस्त प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी म्यूनिसिपल कमेटी पार्क से होते हुए पुराने अस्पताल मार्ग और अंतरराज्यीय बस अड्डे के रास्ते उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं।
इस दौरान किसान योद्धा सरदार रुड़का सिंह कल्याण समिति के अध्यक्ष इंजीनियर बलवीर चौधरी ने कहा कि लाल सिंगी में चल रहा बंदोबस्त ग्रामीणों के हितों के खिलाफ किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूमि विवाद के चलते कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की होगी। उन्होंने मांग की कि महाल लाल सिंगी में जमीन की खरीद-फरोख्त, बिक्री, तबादला, निशानदेही और तक्सीम पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि भूमि चोरी जैसी गतिविधियों को रोका जा सके।
इंजीनियर बलवीर चौधरी ने आरोप लगाया कि निजी और सरकारी जमीनों में हेरफेर की जा रही है और ग्रामीणों को जानबूझकर नया राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा। वहीं, ग्रामीण संदीप कुमार पुत्र तिलक राज ने बताया कि उनकी पुश्तैनी जमीन में जबरन सड़क निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके दादा बिहारी लाल ने करीब 50 वर्ष पहले 2 कनाल 1 मरला भूमि खरीदी थी, जिस पर उनका परिवार पिछले कई दशकों से काबिज है। नियमों के अनुसार यह जमीन नए राजस्व रिकॉर्ड में उनके परिवार के नाम दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से कागजों में सड़क दिखाकर जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि सचिव राजस्व द्वारा 31 मई 2008 को भू-व्यवस्था अधिकारी धर्मशाला को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि महाल लाल सिंगी का बंदोबस्त मौके पर कब्जे के आधार पर किया जाए, क्योंकि पुराने राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए नायब तहसीलदार भू-व्यवस्था ऊना ने जमीन की निशानदेही के आदेश जारी कर दिए, जबकि इस मामले में सिविल कोर्ट ऊना पहले ही रोक लगा चुकी है। साथ ही हाईकोर्ट ने भी महाल लाल सिंगी के बंदोबस्त को अंतिम रूप न देने के आदेश दे रखे हैं।ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1955-56 की जमाबंदी के अनुसार इस भूमि की किस्म “गैरमुमकिन भेठ” है, जिसमें किसी भी प्रकार के रास्ते का कोई उल्लेख नहीं है। मौके पर भी कोई सड़क मौजूद नहीं है और जमीन पर फसल