Dharamshala, Rahul-:प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के चाय बागानों से इस वर्ष उत्पादित होने वाली प्रसिद्ध कांगड़ा चाय के उत्पादन में कमी दर्ज की गई है। बीते वर्ष की तुलना में इस साल करीब तीन हजार किलोग्राम कम चाय का उत्पादन हुआ है, जिससे चाय उद्योग से जुड़े उत्पादकों और प्रबंधन की चिंताएं बढ़ गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष धर्मशाला में कुल एक लाख 38 हजार किलोग्राम चाय का उत्पादन हुआ था, जबकि इस वर्ष यह घटकर लगभग एक लाख 35 हजार किलोग्राम रह गया है।
चाय उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि उत्पादन में इस गिरावट का मुख्य कारण मौसम की बेरुखी रही है। वर्ष की शुरुआत में लंबे समय तक ड्राई स्पेल रहने से चाय की नई पत्तियों की बढ़वार प्रभावित हुई। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में हल्की और नियमित बारिश चाय के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों में नई कोपलें निकलने में मदद मिलती है। लेकिन इस बार सर्दियों की शुरुआत में अपेक्षित बारिश न होने से चाय बागानों पर नकारात्मक असर पड़ा।हालांकि जून माह के मध्य में हुई लगातार बारिश ने चाय उत्पादन को कुछ हद तक संजीवनी दी। उद्योग प्रबंधन के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में उत्पादन की रफ्तार काफी धीमी रही, लेकिन मानसून की सक्रियता के बाद चाय उत्पादन में सुधार देखने को मिला। इसके बावजूद कुल उत्पादन पिछले वर्ष के आंकड़े को छू नहीं सका।
धर्मशाला के चाय उद्योग में मुख्य रूप से ब्लैक टी का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा यहां ग्रीन टी और विशेष रूप से उलोंग टी भी तैयार की जाती है, जिसकी मांग देश-विदेश में लगातार बढ़ रही है। धर्मशाला में उत्पादित कांगड़ा चाय का एक हिस्सा दिल्ली और कुछ कॉरपोरेट खरीदारों को सीधे बेचा जाता है, जहां रिटेल स्तर पर इसकी बिक्री होती है। इसके साथ ही कई विदेशी खरीदार भी सीधे चाय की खरीद करते हैं। हालांकि, यहां उत्पादित चाय का बड़ा हिस्सा नीलामी के लिए कोलकाता भेजा जाता है, जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत तय होती है।चाय उद्योग प्रबंधन का कहना है कि यदि आने वाले समय में मौसम अनुकूल रहा और सर्दियों में पर्याप्त बारिश हुई, तो अगले सीजन में उत्पादन में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए चाय उत्पादक सतर्क नजर आ रहे हैं।