नई दिल्ली | छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व एक्साइज कमिश्नर निरंजन दास, 30 अन्य एक्साइज अधिकारियों और राज्य की तीन प्रमुख डिस्टिलरीज की 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए करीब 2,800 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले की जांच के तहत की गई है।
ईडी के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों ने मिलकर एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट के जरिए एक्साइज विभाग पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसी नेटवर्क के जरिए अवैध कमीशन, बिना हिसाब शराब बिक्री और नीति में हेरफेर कर भारी अवैध कमाई की गई।
क्या-क्या संपत्तियां जब्त
ईडी ने इस कार्रवाई में 78 अचल संपत्तियां अटैच की हैं, जिनमें लग्जरी बंगले, प्रीमियम आवासीय परिसरों के फ्लैट, व्यावसायिक दुकानें और कृषि भूमि शामिल हैं। इसके अलावा 197 निवेश भी जब्त किए गए हैं, जिनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, बैंक बैलेंस, जीवन बीमा पॉलिसियां, शेयर और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो शामिल हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इनमें से 38.21 करोड़ रुपये की संपत्तियां निरंजन दास और 30 अन्य एक्साइज अधिकारियों से जुड़ी हैं। निरंजन दास एक आईएएस अधिकारी हैं और उस दौरान राज्य के राजस्व हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
वहीं, 68.16 करोड़ रुपये की संपत्तियां छत्तीसगढ़ की तीन डिस्टिलरीज—छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज लिमिटेड, भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड और वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड—से संबंधित बताई गई हैं।
समानांतर एक्साइज सिस्टम का आरोप
ईडी का आरोप है कि निरंजन दास और तत्कालीन एमडी, छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड अरुण पति त्रिपाठी ने मिलकर राज्य की आधिकारिक व्यवस्था को दरकिनार करते हुए एक समानांतर एक्साइज सिस्टम संचालित किया। इसके जरिए शराब कारोबार से बड़े पैमाने पर अवैध आय अर्जित की गई।
नई चार्जशीट में बड़ा खुलासा
ईडी ने 26 दिसंबर को इस मामले में नई चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 2019-2023 के बीच एक्साइज विभाग में फैले भ्रष्टाचार की विस्तृत जानकारी दी गई है। एजेंसी का दावा है कि इस अवधि में 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध आय का पता चला है।
81 आरोपी, कई बड़े नाम शामिल
अब तक इस घोटाले में कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, निरंजन दास, पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी अनिल टूटेजा (सेवानिवृत्त आईएएस), पूर्व एक्साइज मंत्री कवासी लखमा, और मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी सौम्या चौरसिया शामिल हैं। इसके अलावा रायपुर के मेयर अयाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर, तीनों डिस्टिलरीज और कई निजी व्यक्ति भी आरोपियों की सूची में हैं।
प्रशासनिक-राजनीतिक मिलीभगत के आरोप
ईडी के अनुसार जांच में तत्कालीन प्रशासनिक और राजनीतिक तंत्र की गहरी साजिश सामने आई है। चैतन्य बघेल और कवासी लखमा पर नीति को मंजूरी देने और अवैध धन को व्यवसाय तथा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में लगाने के आरोप हैं।
सौम्या चौरसिया पर अवैध नकदी के प्रबंधन और एक्साइज विभाग में अनुकूल अधिकारियों की तैनाती का समन्वय करने का आरोप लगाया गया है।
हर केस पर तय था कमीशन
एजेंसी का दावा है कि एक्साइज अधिकारियों को अपने क्षेत्र में शराब बिक्री की अनुमति देने के बदले प्रति केस 140 रुपये का फिक्स्ड कमीशन दिया जाता था। अकेले निरंजन दास पर आरोप है कि उन्होंने हर महीने करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत ली और इस तरह 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय अर्जित की।
चार तरीकों से की गई अवैध कमाई
ईडी के मुताबिक सिंडिकेट ने शराब कारोबार से अवैध कमाई के लिए चार प्रमुख रास्ते अपनाए—
- अवैध कमीशन
- बिना हिसाब की शराब बिक्री
- कार्टेल कमीशन
- एफएल-10ए लाइसेंस के जरिए विदेशी शराब निर्माताओं से वसूली
एजेंसी का कहना है कि यह पूरा तंत्र राज्य के नियंत्रण को चकमा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था और जांच अभी भी जारी है।