Shimla, Sanju:कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने अमेरिका की बदली हुई विदेश और व्यापार नीति, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों तथा उनके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनाव के बाद वैश्विक मंच पर टैरिफ और दबाव की राजनीति तेज हुई है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, किसानों और देश की संप्रभुता पर पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार खामोश बनी हुई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
राठौर ने कहा कि एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र बताते हैं, वहीं दूसरी ओर रूस से कच्चे तेल के आयात और भारत की स्वतंत्र नीतियों पर सार्वजनिक रूप से असंतोष भी जताते हैं। भारत–पाकिस्तान तनाव के संदर्भ में ट्रंप द्वारा युद्धविराम कराने का दावा करना और पाकिस्तान के सैन्य जनरल को व्हाइट हाउस में आमंत्रित करना भारतीय जनता की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई स्पष्ट और सशक्त प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।कांग्रेस प्रवक्ता ने 1971 के ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव को ठुकराते हुए राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा था, जिसके परिणामस्वरूप देश को निर्णायक विजय मिली। उन्होंने कहा कि आज भी भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जिसकी आबादी दुनिया में सबसे अधिक है और जो एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका है। ऐसे में किसी भी विदेशी दबाव के आगे झुकना देशहित के खिलाफ होगा।
हिमाचल की बागवानी पर खतरे की आशंका
राठौर ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा “ज़ीरो टैरिफ” जैसे प्रस्तावों और दबावों का सबसे अधिक नुकसान हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को हो सकता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में रेड डिलीशियस जैसे सेबों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। यदि भारतीय बाजार को बिना सुरक्षा के खोल दिया गया, तो पहाड़ी राज्यों के छोटे और सीमांत बागवान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमाचल प्रदेश की बागवानी अर्थव्यवस्था 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की है और इसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
न्यूज़ीलैंड समझौते पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने न्यूज़ीलैंड के साथ हुए व्यापार समझौते का हवाला देते हुए कहा कि आयात शुल्क में 25 प्रतिशत तक की कटौती से स्थानीय किसानों में भारी निराशा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपे और प्रधानमंत्री व केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखे, लेकिन केंद्र सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई।उन्होंने कहा कि केवल एक औपचारिक जवाब मिला,जबकि अधिकांश मामलों में दिल्ली स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध कमजोर हुए हैं। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर भारत की प्रभावी कूटनीतिक भूमिका नजर नहीं आती। देश के भीतर बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव से ध्यान भटकाने के लिए विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के पक्ष में है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो पहल का उद्देश्य देश को जोड़ना है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले पहाड़ी राज्यों के किसानों और बागवानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और विदेशी दबाव के बजाय राष्ट्रहित में दृढ़ और साहसिक फैसले लिए जाएं।