अमेरिका | अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त और विवादास्पद रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेना अमेरिका की “राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं” में शामिल है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सैन्य विकल्प को भी पूरी तरह नकारा नहीं गया है।
मंगलवार (6 जनवरी 2026) को रॉयटर्स के सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी विदेश नीति टीम ग्रीनलैंड को लेकर सभी संभावित रास्तों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसमें कूटनीतिक, राजनीतिक और रणनीतिक विकल्पों के साथ-साथ सैन्य पहलू भी शामिल हैं। प्रशासन का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए बेहद अहम हो गया है।
व्हाइट हाउस के आधिकारिक बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आर्कटिक क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वियों को रोकने और रणनीतिक बढ़त बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है। कमांडर-इन-चीफ के रूप में अमेरिकी सेना का इस्तेमाल हमेशा एक विकल्प के तौर पर मौजूद रहेगा।”
दरअसल, ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। यह क्षेत्र आर्कटिक में स्थित है, जहां रूस और चीन की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड से अमेरिका न केवल इन देशों की सैन्य गतिविधियों पर नजर रख सकता है, बल्कि भविष्य में यहां मौजूद प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा भंडारों तक भी पहुंच बना सकता है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका की दीर्घकालिक सुरक्षा नीति से जोड़कर देख रहा है।
ट्रंप के इस रुख से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो के कई सहयोगी देशों ने इसकी संप्रभुता का समर्थन किया है। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने अमेरिका की मंशा पर आपत्ति जताई है। इसके बावजूद व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि यह मुद्दा जल्द ठंडा पड़ने वाला नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि अपने मौजूदा कार्यकाल के दौरान ही अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण स्थापित करे। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि “नाटो देशों के विरोध के बावजूद यह विषय एजेंडे पर बना रहेगा और अमेरिका पीछे हटने के मूड में नहीं है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का आक्रामक रुख आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़े टकराव का कारण बन सकता है। आर्कटिक क्षेत्र की बढ़ती रणनीतिक अहमियत के चलते यह मुद्दा वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।