लुधियाना | कड़ाके की ठंड और घने कोहरे को देखते हुए पंजाब सरकार द्वारा स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां दोबारा बढ़ाए जाने के फैसले से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों पर संकट खड़ा हो गया है। यह निर्णय खासतौर पर सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए चिंता का कारण बन रहा है, जिनकी परीक्षाएं क्रमशः 17 और 12 फरवरी से शुरू होनी हैं।
शिक्षाविदों का कहना है कि 14 जनवरी को स्कूल खुलने की स्थिति में छात्रों के पास बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए केवल 33 दिन का समय बचेगा। इसी अवधि में प्री-बोर्ड परीक्षाएं, प्रैक्टिकल एग्जाम, सिलेबस की दोहराई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के परिणामों पर पड़ सकता है।
हालांकि, कई निजी स्कूलों ने पहले से ही प्रैक्टिकल और प्री-बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं ताकि छुट्टियां समाप्त होते ही परीक्षाएं आयोजित कर बोर्ड को समय पर अंक भेजे जा सकें और विद्यार्थियों के एडमिट कार्ड जारी हो सकें।
कोचिंग संस्थानों पर सवाल, आदेश सिर्फ स्कूलों तक सीमित क्यों?
छुट्टियों के फैसले को लेकर सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। ‘बचपन बचाओ’ सोसाइटी के अध्यक्ष रजत ने जिला प्रशासन और उपायुक्त से मांग की है कि छुट्टियों के आदेश निजी कोचिंग सेंटरों पर भी समान रूप से लागू किए जाएं। उनका कहना है कि किचलू नगर और मॉडल टाउन जैसे इलाकों में कोचिंग संस्थान सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी पहुंच रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ठंड और कोहरे के कारण स्कूल बंद किए गए हैं, तो क्या कोचिंग सेंटरों में जाने वाले बच्चों पर मौसम का असर नहीं पड़ता? उनका आरोप है कि इस स्थिति से डमी एडमिशन वाले छात्रों और कोचिंग माफिया को फायदा मिल रहा है, जबकि नियमित स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र पीछे रह जा रहे हैं।
स्कूल बंद, लेकिन शिक्षकों की ड्यूटी जारी
निजी स्कूल प्रबंधन का कहना है कि एक ओर बच्चों की छुट्टियां की गई हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और गैर-शिक्षण स्टाफ को पीएम श्री योजना समेत अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए स्कूलों में बुलाया जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि स्टाफ से काम लिया जा सकता है और अन्य गतिविधियां कराई जा सकती हैं, तो बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
ग्रीनलैंड स्कूल्स के चेयरमैन डॉ. राजेश रुद्रा ने कहा कि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं और प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए समय बेहद सीमित रह गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कम से कम कक्षा 10वीं और 12वीं के लिए स्कूल खोलने की अनुमति देनी चाहिए थी। वहीं एचवीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के अध्यक्ष डी.पी. शर्मा ने कहा कि छुट्टियों के कारण प्री-बोर्ड परीक्षा का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ चुका है और अब सीमित समय में रिवीजन कराना चुनौतीपूर्ण होगा, जिसके लिए शिक्षकों को अतिरिक्त कक्षाएं लेनी पड़ेंगी।