अंबाला। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। अंबाला शहर के जगाधरी गेट पर कांग्रेस विधायकों और कार्यकर्ताओं ने सांकेतिक धरना देकर भाजपा सरकार के फैसले का विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने साफ किया कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा और आने वाले दिनों में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
धरने में अंबाला शहर के विधायक निर्मल सिंह, नारायणगढ़ की विधायक शैल्ली चौधरी, जिला कांग्रेस अध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर मनरेगा को कमजोर करने और गरीब मजदूरों से रोजगार छीनने का आरोप लगाया।
भाजपा पर मनरेगा खत्म करने का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए अंबाला शहर के विधायक निर्मल सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा को समाप्त करने की मंशा से उसका नाम बदलने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2006 में लागू की थी, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों को रोजगार का अधिकार मिला। अगर इस योजना को कमजोर किया गया तो सबसे ज्यादा नुकसान गरीब मजदूरों को होगा।
निर्मल सिंह ने बताया कि मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस देशभर में आंदोलन कर रही है और यह प्रदर्शन अंततः विधानसभा घेराव के बाद ही समाप्त होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार के इस फैसले के गंभीर परिणाम सामने आएंगे।
गरीब मजदूरों की लड़ाई जारी रहेगी: शैल्ली चौधरी
नारायणगढ़ की कांग्रेस विधायक शैल्ली चौधरी ने भी धरने में भाग लिया और कहा कि भाजपा ने मनरेगा को खत्म करने की नीति बना ली है। उन्होंने कहा कि मनरेगा का अधिकार पंचायतों के पास होने से ग्रामीण स्तर पर गरीबों को रोजगार मिलता था। कांग्रेस पार्टी इस अधिकार को खत्म नहीं होने देगी।
शैल्ली चौधरी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह सांकेतिक धरना है, लेकिन जब तक सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती, तब तक कांग्रेस गरीब मजदूरों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ती रहेगी।
कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि मनरेगा के नाम और स्वरूप से छेड़छाड़ गरीबों के हितों पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।