Mandi, Dharamveer-:शहर में रेहड़ी-फड़ी मुक्त बनाने के प्रयासों के बीच बाईपास पर बनाई जा रही नई रेहड़ी-फड़ी मार्किट को लेकर विवाद तेज हो गया है। मंडी सदर के विधायक अनिल शर्मा द्वारा 6 करोड़ रुपए की लागत से बाईपास पर बनाई जा रही इस मार्किट में सभी रेहड़ी-फड़ी धारकों को स्थान दिया जाना है। लेकिन रेहड़ी-फड़ी यूनियन ने इसका विरोध कर दिया है और साफ कह दिया है कि वे इस मार्किट में कभी नहीं जाएंगे, चाहे उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़े।
यूनियन के प्रधान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मार्किट की जानकारी उन्हें विधायक के मीडिया बयानों से ही मिली है। इसके बावजूद नगर निगम ने टाउन वेंडिंग कमेटी की कोई बैठक नहीं बुलाई है। सुरेंद्र कुमार के अनुसार, यह बैठक केंद्र सरकार के टाउन वेंडिंग एक्ट के तहत हर तीन महीने में आयोजित करनी अनिवार्य है, लेकिन पिछले एक वर्ष से इस कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई है।सुरेंद्र कुमार ने कहा कि रेहड़ी-फड़ी धारक हमेशा शहरवासियों की सुविधा के लिए उपलब्ध रहे हैं। उनका रोजगार इस व्यवसाय पर निर्भर है और बिना उनकी राय लिए नए स्थान पर जबरन भेजना अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनियन इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करेगी।
रेहड़ी-फड़ी धारक प्रवीण कुमार का कहना है कि शहरभर में लगी रेहड़ियों से शहरवासियों को अपने घर के पास ही जरूरी सामान मिल जाता है। उन्होंने बताया कि अगर सभी को एक ही स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा, तो न केवल शहरवासियों को असुविधा होगी बल्कि व्यापारियों का रोजगार भी प्रभावित होगा। प्रवीण ने कहा, “बाईपास पर मार्किट में खरीदारी करने कोई नहीं आएगा। इससे हमारे रोजगार पर संकट मंडराएगा।”
वहीं, विधायक अनिल शर्मा ने भी इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी को उजाड़ना नहीं बल्कि बसाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो आना चाहता है, वो आए, और जो नहीं आना चाहता, उसके लिए शहर में नियमों के अनुसार व्यवस्था की जाएगी। विधायक के अनुसार, इस मार्किट में 300 रेहड़ियों के लिए जगह होगी और यह शहर की एक भव्य और व्यवस्थित मार्किट के रूप में विकसित होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि बाद में इसके विरोध करने वाले पछतावा भी कर सकते हैं।
वर्तमान में मंडी में स्थिति विधायक और रेहड़ी-फड़ी धारकों के आमने-सामने रहने की है। भविष्य में इस विवाद का समाधान कैसे होगा, यह देखना बाकी है। खासतौर पर, मार्किट का शिवरात्रि के अवसर पर शुभारंभ करने का कार्यक्रम भी योजनाबद्ध है।
इस बीच व्यापारियों की चिंता है कि बाईपास मार्किट तक ग्राहकों की संख्या कम होने से उनका रोजगार प्रभावित होगा। वहीं, नगर निगम और विधायक का कहना है कि यह कदम शहर को व्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाने के लिए जरूरी है।सुरेंद्र कुमार ने कहा, “हमें बिना जानकारी दिए कोई निर्णय नहीं करना चाहिए। हम अपने अधिकारों और रोजगार के लिए पूरी तरह से खड़े हैं।” प्रवीण कुमार ने भी यही बात दोहराई कि शहरवासियों और व्यापारियों दोनों की सुविधा के लिए वर्तमान रेहड़ी प्रणाली सबसे बेहतर है।
विधायक अनिल शर्मा का कहना है कि यह योजना शहर की संगठित और सुरक्षित मार्किट के लिए बनाई जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी रेहड़ी-फड़ी धारक इस मार्किट में शामिल नहीं होना चाहते, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी.इस विवाद से यह साफ है कि मंडी में रेहड़ी-फड़ी मार्किट का मुद्दा अभी तुलसी में पका नहीं है। व्यापारियों और प्रशासन के बीच आमने-सामने की स्थिति जारी है, और नए समाधान खोजने की जल्दी भी है।