चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार ने सामाजिक समरसता और सम्मानजनक भाषा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने सभी सरकारी दस्तावेजों, पत्राचार, आदेशों और आधिकारिक संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला समाज के सभी वर्गों की गरिमा बनाए रखने और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप भाषा के इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़े समुदायों के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग न किया जाए, जिन्हें वे स्वयं असम्मानजनक या पुराने सामाजिक संदर्भों से जुड़ा मानते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अब इन शब्दों की जगह संविधान में मान्य और सम्मानजनक शब्दावली का ही उपयोग किया जाए।
सरकार ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, शैक्षणिक संस्थानों और जिला प्रशासन को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि भविष्य में जारी होने वाले किसी भी सरकारी पत्र, अधिसूचना, विज्ञप्ति या रिपोर्ट में प्रतिबंधित शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। यदि किसी दस्तावेज में इस तरह की भाषा पाई जाती है, तो उसे संशोधित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सामाजिक संवेदनशीलता को मजबूत करने वाला है। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज की सोच और मानसिकता को भी दर्शाती है। ऐसे में सरकारी स्तर पर शब्दावली में बदलाव से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय सामाजिक बराबरी और सम्मान की दिशा में एक ठोस पहल है। सरकार का दावा है कि आगे भी वह ऐसे सुधारात्मक कदम उठाती रहेगी, जिससे हरियाणा में सभी समुदायों को समान सम्मान और अधिकार मिल सकें।