पंचकूला | महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदले जाने को लेकर हरियाणा में सियासी घमासान तेज हो गया है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने इस फैसले को भाजपा की साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर गरीबों और मजदूरों से जुड़ी इस योजना को कमजोर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
रामपाल माजरा ने कहा कि मनरेगा देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, जिससे करोड़ों गरीब परिवारों को सीधे लाभ मिलता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद इस योजना का नाम बदलकर इसकी मूल भावना को खत्म करने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि धीरे-धीरे योजना को समाप्त करने की रणनीति का हिस्सा है।
इनेलो प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि मनरेगा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को काम और सम्मान मिला, लेकिन अब नए नाम और नए ढांचे के जरिए केंद्र सरकार राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने की तैयारी में है। इससे ग्राम पंचायतों की भूमिका कमजोर होगी और ग्रामीण रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के समय गरीब, किसान और मजदूर वर्ग से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन अब उन्हीं वर्गों के हितों पर चोट की जा रही है। माजरा ने चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के साथ छेड़छाड़ बंद नहीं हुई तो इनेलो सड़क से सदन तक विरोध करेगी।
वहीं, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी मनरेगा का नाम बदलने का विरोध करते हुए इसे महात्मा गांधी की विचारधारा के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इससे योजना की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि योजना का नाम बदलने और संरचना में सुधार का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को और प्रभावी बनाना है। सरकार का दावा है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण विकास को गति मिलेगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर प्रदेश और देशभर में राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।