चंडीगढ़ | पंजाब में मीडिया पर सरकार की कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस, अकाली दल, भाजपा और अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने पंजाब सरकार के कदम की तीखी आलोचना की और इसे राज्य में ‘अघोषित आपातकाल’ बताया। विपक्ष ने कहा कि यह मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मूल भावना पर सीधे हमला है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार की कार्रवाई निंदनीय है और प्रैस की आज़ादी के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। चुघ ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र के इस स्तंभ को दबाने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।
अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने भी इस कदम को प्रैस पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ और अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल इस तानाशाही प्रवृत्ति को लेकर जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात करेगा।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह राजा वडिंग ने कहा कि सरकार ने सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ दिया है और पंजाब केसरी समूह पर हमले से यह साबित हो गया कि राज्य सरकार की मीडिया पर भरोसा नहीं है।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मीडिया को डराना आम जनता की आवाज़ दबाने के समान है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आपातकाल जैसी सोच और सत्ता का अहंकार लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है।
हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा अपनाई गई दमनकारी प्रवृत्ति गंभीर खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच को कुछ समय के लिए परेशान किया जा सकता है, पर पराजित नहीं किया जा सकता। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भी इस कार्रवाई को पत्रकारिता को डराने और दबाने की कोशिश बताया।
सिरसा के दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पंजाब में हो रही घटनाएं बदलाव नहीं, बल्कि प्रतिशोध हैं। पंजाब भाजपा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा का प्रतिनिधिमंडल 17 जनवरी को राज्यपाल से मुलाकात कर इस मामले पर ध्यान दिलाएगा।
अश्वनी शर्मा और केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू ने भी कहा कि पंजाब केसरी और इससे जुड़े मीडिया संस्थानों पर हुए छापे लोकतंत्र और प्रैस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं। सैनी ने कहा कि पंजाब सरकार अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए मीडिया पर हमले कर रही है।
इस पूरे विवाद ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब में मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए राजनीतिक दलों और जनमानस की सजगता बेहद जरूरी है।