नई दिल्ली |हरियाणा के वरिष्ठ नेता और भाजपा के प्रभावशाली मंत्री अनिल विज ने पंजाब में मीडिया स्वतंत्रता से जुड़े हालिया विवाद पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के माध्यम से कहा कि पंजाब में ‘पंजाब केसरी’ समूह और इससे जुड़े संस्थानों के खिलाफ सरकार की कथित कार्रवाइयाँ लोकतंत्र और प्रेस स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं।
मंत्री अनिल विज ने ट्वीट में लिखा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने विभिन्न विभागों के माध्यम से बिना किसी ठोस आधार और तय प्रक्रिया के समाचार पत्र समूह और प्रेस संस्थानों पर कार्रवाई शुरू की, जिससे मीडिया की आवाज़ दबाने और डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र का अहम स्तंभ है। विज ने इस कार्रवाई की तुलना 1975 के आपातकाल से की, जब सरकार ने स्वतंत्र आवाज़ों को दबाया था।
पंजाब केसरी समूह का आरोप है कि सरकारी विभागों ने प्रेस संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए, प्रिंटिंग प्रेस पर दबाव बनाया और रिपोर्टिंग गतिविधियों में बाधा डाली। विपक्षी नेताओं और पत्रकार संगठनों ने भी इस कार्रवाई की निंदा की है और इसे नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। भाजपा और अन्य राजनीतिक दल प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आगे आए हैं और राज्य सरकार की इस नीति का विरोध कर रहे हैं।
अनिल विज ने ट्विटर पर स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए मीडिया स्वतंत्रता सर्वोपरि है और सरकारों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा का पालन करना चाहिए। उनके अनुसार, स्वतंत्र पत्रकारिता दबाना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले में आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और कानूनी प्रक्रियाएँ और तेज होंगी, जिससे मीडिया स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थानों की सुरक्षा पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान जाएगा। इस विवाद ने एक बार फिर प्रेस की अहमियत और लोकतंत्र में उसके योगदान को उजागर किया है।